भारतीय सेना और चीन की सेना के बीच लद्दाख के गलवान घाटी में संघर्ष के बाद आर्थिक मोर्चे पर चीन को सबक सिखाने की तैयारी चल रही है। भारतीय जनमानस में जहां चीनी सामानों के बहिष्कार की मांग जोर पकड़ ली है वहीं कई जगह व्यापारी भी आगे आ रहे हैं। बता दें सोमवार की रात भारत और चीन के सैनिकों के बीच खूनी संघर्ष हुआ, जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए तो चीन के 40 से अधिक सैनिक मारे गए हैं। आइए जानें गलवान में झड़प के बाद अब तक आर्थिक मोर्चे पर क्या-क्या हुआ…
कोलकाता में कारोबारियों ने चीन से आयात रोका
कोलकाता के आयातकों ने चीन से आयात किए जाने वाले सामान को फिलहाल रोक दिया है। कलकत्ता सीमाशुल्क हाउस एजेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुजीत चक्रवर्ती ने कहा कि खिलौनों से लेकर लाइट वगैरह समेत कई रोजमर्रा के उपभोक्ता सामानों का आयात चीन से किया जाता है। लॉकडाउन की वजह से चीन के साथ साझा व्यापार पहले ही 30 से 40 प्रतिशत गिर गया था। अब इस संघर्ष की वजह से आयातकों ने अपने ऑर्डर रोक दिए हैं।
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उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा कि निर्यातकों ने भी अपनी चिंता जताई है। इंजीनियरिंग निर्यात संवर्द्धन परिषद (ईईपीसी) के चेयरमैन रवि सहगल ने कहा कि इससे (संघर्ष से) चीन को इंजीनियरिंग सामान के निर्यात में भी अस्थायी बाधा आ सकती है क्यों कि आयातक और निर्यातक कारोबार में राजनीति नहीं मिलाते। भारत से इंजीनियरिंग सामान का आयात करने वाले शीर्ष 25 देशों में से चीन ऊपर के दो देशों में से एक है। अप्रैल 2020 में भारत का चीन को इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर सकारात्मक रहा है। कोलकाता बंदरगाह पर कुल जितना मालवहन किया जाता है, उसका करीब 20 प्रतिशत अकेले चीन के साथ व्यापार के चलते होता है।
चीन चाय के लिए एक अहम बाजार, लेकिन व्यापार राष्ट्रीय हितों से ऊपर नहीं
लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच संघर्ष के संदर्भ में चाय बोर्ड के चेयरमैन प्रभात के. बेजबरुआ ने बधुवार को कहा कि चाय निर्यात के लिए चीन एक ‘अहम बाजार है, लेकिन व्यापार राष्ट्रीय हितों से ऊपर जाकर नहीं हो सकता। बेजबरुआ ने पीटीआई-भाषा से कहा, ” राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाओं और हमारे जवानों की सुरक्षा सर्वोपरि है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इसकी पुनरावृत्ति ना हो। चीन का अपने लगभग सभी पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद है। चाय बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन अरुण कुमार रे ने कहा कि भारत दुनियाभर में चाय का निर्यात करता है। उसके कुल चाय निर्यात में चीन की हिस्सेदारी करीब पांच प्रतिशत है।
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बेजबरुआ ने कहा, ”सीमा पर मौजूदा तनाव को देखते हुए यदि चीन के साथ व्यापार पर यदि प्रतिबंध लगता है तो निश्चित तौर पर चाय का निर्यात प्रभावित होगा। चाय उद्योग इस संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। बेजबरुआ ने कहा, ” भारत यूं तो चीन को बहुत ज्यादा चाय निर्यात नहीं करता, लेकिन भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक अहम बाजार है, और दीर्घावधि में यह रहने वाला भी है। हालांकि व्यापार राष्ट्रहित से ऊपर नहीं हो सकता।
चीनी सामान के बहिष्कार का आह्वान
गतिरोध के बाद देश के कुछ भागों में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की मांग तेज हुई है। खुदरा व्यापारियों के संगठन कैट जैसे कुछ उद्योग संगठनों ने सीमा विवाद को देखते हुए चीनी सामान के बहिष्कार का आह्वान किया है। बता दें वित्त वर्ष 2019-20 में अप्रैल-फरवरी के दौरान भारत का निर्यात चीन को 15.54 अरब डॉलर का रहा जबकि आयात 62.38 अरब डॉलर का था।
चीनी उपकरणों पर रोक
केंद्र सरकार ने देश में 4जी के क्रियान्वयन के लिए इस्तेमाल होने वाले चीनी उपकरणों पर रोक लगा दी है। रोक के लिए सरकार ने संचार विभाग और सरकारी टेलीकॉम कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल को भी निर्देश दे दिए हैं। इसके अलावा सरकार निजी कंपनियों के ऑपरेटरों को भी यह निर्देश देने के लिए कदम उठा रही है, ताकि चीन के उपकरणों पर उनकी निर्भरता को कम किया जा सके। दरअसल चीनी कंपनियों द्वारा बनाए गए उपकरणों की नेटवर्क सुरक्षा चिंता का विषय है। चीन की कंपनियों को रोकने के लिए नए टेंडर निकाले जाएंगे।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
जवाहरलाल नेहरू विश्विविद्यालय के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा कि चीन पर किसी प्रकार की व्यापार पाबंदी का असर भारत पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, ”चीन पर हमारी निर्भरता काफी ज्यादा है। दवाओं में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण रसायन (एपीआई) जैसे कई महत्वपूर्ण उत्पादों के लिएहम चीन पर निर्भर हैं। हमारे पास उन महत्वपूर्ण उत्पादों के लिएकोई विकल्प या बाजार नहीं है और स्थिति एक दिन में नहीं बदलेगी।
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अर्थशास्त्री प्रणब सेन ने हिंदुस्तान को बताया है कि चीन पर भारत की निर्भरता आयात के मोर्चे पर अच्छी-खासी है। अगर दोनों देशों के संबंध खराब होते हैं तो उसका खामियाजा भारत को सामान की तंगी और महंगे आयात के तौर पर झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अच्छा होगा सभी परिस्थितियों को भांपते हुए हम अभी से जरूरी सामानों के आयात के लिए दूसरे देशों से संपर्क करना शुरू कर दें। चीन से भारत बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और पार्ट्स, दवाएं और ऑटोमोबाइल कंपोनेट के लिए निर्भर रहते हैं।
इनपुट: एजेंसी







