Edited By Vishnu Rawal | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

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नई दिल्ली

कोरोना वायरस काल में सरकार, डॉक्टर, एक्सपर्ट सबने घर रहने की सलाह दी, जिससे जानलेवा कोरोना वायरस से बचा जा सके। लेकिन इस दौरान लोगों को दूसरी बीमारियों ने घेर लिया। इसमें सबसे बड़ी बीमारी डायिटीज (टाइप-2) है, जिसका खतरा इस कोरोना लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा बढ़ा। यह चिंता की वजह इसलिए भी है क्योंकि कोरोना और डायबटीज एकसाथ हो जाना मानों बचने के बेहद कम चांस।

इससे जुड़ी एक स्टडी की गई। इसमें 100 ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिन्हें फिलहाल डायबिटीज नहीं है। पाया गया कि 40 प्रतिशत लोगों का लॉकडाउन में वजन बढ़ गया। इसमें से 16 प्रतिशत तक लोगों का वजन 2.1 किलो से 5 किलो तक बढ़ गया था। स्टडी में शामिल डॉक्टर अनूप मिश्रा (एम्स में मेडिसिन के पूर्व प्रफेसर) ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान जिन 40 प्रतिशत लोगों का वजन बढ़ा उनको डायबिटीज होने के चांस 7 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं और हो सकता है उनमें यह बीमारी आ चुकी है लेकिन अभी लक्षण न दिख रहे हों।

100 लोगों से यह डेटा 49 दिनों तक लिया गया। स्टडी के मुताबिक, लॉकडाउन की वजह से इधर-उधर आने-जाने पर पाबंदी थी। लोगों ने सेहत पर उतना ध्यान नहीं दिया, घर पर रहकर जो मन में आया खाया जिससे वजन बढ़ा और उससे डायबिटीज का खतरा।



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