- बिकरू हत्याकांड की पहले ही हो चुकी थी साजिश, विकास दुबे का ऑडियो वायरल
- विकास दुबे ने फोन पर कहा था, जिंदगी पर फरारी काट लूंगा, इतना बड़ा कांड करूंगा
- विकास दुबे की पुलिस के साथ थी गहरी दोस्ती, इस ऑडियो से समझ आ जाएगा पूरा खेल
- ऑडियो के बावजूद क्यों नहीं हुई विकास दुबे पर कार्रवाई, पहले से कुख्यात को थी हर जानकारी
कानपुर
विकास दुबे कानपुर वाला…यह आवाज लोगों के जेहन में जिंदा है। दरअसल, हर दिन नया खुलासा कुख्यात विकास दुबे की पैठ की कहानी बयां करता है। बिकरू गांव का हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे हत्याकांड से पहले ही भयानक वारदात की चेतावनी दे चुका था। तमाम जांचों के बीच विकास दुबे का एक ऑडियो वायरल हो रहा है। इसमें विकास दुबे फोन पर सामने मौजूद शख्स से गालीगलौच के साथ कह रहा है कि कोई मुझ पर फर्जी मुकदमा लिखवा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि विकास दुबे जिस शख्स से बात कर रहा है वह चौबेपुर थाने का तत्कालीन दारोगा विनय तिवारी है। ऑडियो में विकास और विनय तिवारी की बातचीत:
विकास दुबे: मुझे कसम है…चाहे जिंदगीभर फरारी रहना पड़े, इतना बड़ा कांड करूंगा, जानेगा कि किससे पाला पड़ा है।
विनय तिवारी: हमें तो पता करने दो।
विकास दुबे: अगर पूरी जीप न मर गई…एक-एक का खून कर दूंगा, जेल काटूंगा आजीवन, बता रहा हूं, विकास दुबे का शिकार होगा…मार नहीं लूंगा तबतक घर नहीं लौटूंगा, जाओ नहीं तो समझ लो रायता फैलने वाला है।
विनय तिवारी: अरे भइया जाने तो दो हमें।
विकास कोहर चीज की थी जानकारी
इस बातचीत से साफ समझा जा सकता है कि हत्याकांड अचानक नहीं बल्कि पहले से नियोजित था। इसके बावजूद पुलिस विभाग ने इस बातचीत को गंभीरता से निहीं लिया। विभाग ने विकास दुबे को पहले ही इस बात की जानकारी दे दी थी कि कुख्यात अपराधी दुबे पर केस लिखा जा रहा है।
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इस हत्याकांड के बाद से पुलिस विभाग में आज भी यह चर्चा बनी हुई है कि चौबेपुर एसओ विनय तिवारी मुठभेड़ में सबसे पीछे क्यों थे। यही नहीं, वह अपने साथियों को मौत के मुंह मे छोड़कर क्यों भाग गए। उनकी भूमिका शुरूआत से ही संदिग्ध मानी जा रही थी। इसके बाद पुलिस ने निलंबित एसओ विनय तिवारी को जेल भेज दिया था।
तत्कालीन एसएसपी पर भी सवाल
शहीद सीओ की वायरल चिट्ठी में इस बात का खुलासा हुआ था कि निलंबित चौबेपुर थानाध्यक्ष विनय तिवारी ने किस तरह से एक मुकदमे में विकास दुबे पर मेहरबानी दिखाते हुए धारा 386 को विवेचना के दौरान हटवाया था। दारोगा की हरकत से सीओ इतने आहत हुए थे कि उनको तत्कालीन एसएसपी को पत्र लिखना पड़ा था। इसके साथ ही उन्होंने इस बात की आशंका जाहिर की थी कि थानाध्यक्ष अपना रवैया नहीं बदलते हैं तो बड़ी घटना घटित हो सकती है। सीओ की वायरल चिट्ठी की जांच आईजी लखनऊ कर रही हैं। चिट्ठी मामले में तत्कालीन एसएसपी अनंत देव पर भी सवाल खड़े हुए थे।
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‘आतंक के युग का अंत’
विकास दुबे के कान भरता था एसओ
बताया जाता है कि सीओ और निलंबित एसओ में तालमेल नहीं बैठता था। खासतौर पर विकास दुबे का मामला आता था तो सीओ के कहने पर भी निलंबित एसओ टालमटोल करता था। विनय तिवारी पर अधिक दबाव बनाया जाता था तो वह हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के कान भरता था कि सीओ के कहने पर यह कार्रवाई करनी पड़ी। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को लगने लगा कि सीओ जेल भेजने या फिर एनकाउंटर के तैयारी कर रहे हैं।







