पेइचिंग
भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बाद भले ही चीन के नेता शांति की बात कर रहे हों, जमीन पर उनकी हरकतें उनके इरादों पर सवाल खड़े करती हैं। शायद इसीलिए स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने चीन का नाम लिए बिना कहा था कि हमें जिसने चुनौती दी, उसे उसी की भाषा में जवाब दिया गया। पीएम की स्पीच को लेकर जब चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिझियान से सवाल किया गया तो उन्होंने दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों और आपसी सहयोग की अहमियत बताते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक शांति की बात कही है।

15 अगस्त को पीएम मोदी ने कहा था, ‘भारत आज विस्तारवाद का डटकर मुकाबला कर रहा है। हमारे जवान क्या कर सकते हैं, ये लद्दाख में दुनिया ने देख लिया है। पीएम मोदी ने कहा कि जिसने चुनौती दी, उसे उसी की भाषा में जवाब दिया गया।’ इस पर लिझियान ने कहा है- ‘आपसी सम्मान और सपॉर्ट ही सही रास्ता है। चीन और भारत आपसी राजनीतिक विश्वास को बेहतर करने के लिए काम करना, मतभेदों को सही से निपटाना, व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को दूरदृष्टि से कायम रखना जारी रखेंगे।’

लाल किले से प्रधानमंत्री ने चीन और पाकिस्‍तान को दी चेतावनी, आंख उठाने वालों को द‍िया करारा जवाब

इससे पहले उन्होंने कहा कि एक अरब से ज्यादा की आबादी वाले उभरते हुए दोनों बड़े देशों और पड़ोसियों के तौर पर चीन और भारत के संबंधों में विकास से न सिर्फ दोनों देशों और उनके नागरिकों को फायदा होगा बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांत और संपन्नता को स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।

PM ने दिया था विस्तारवाद को जवाब
प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘भारत की संप्रभुता का सम्मान हमारे लिए सर्वोच्च है। हमारे जवान क्या कर सकते हैं, ये लद्दाख में दुनिया ने देख लिया है। LOC से लेकर LAC तक, देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आंख उठाई है, देश ने, देश की सेना ने उसका उसी भाषा में जवाब दिया है। मैं आज मातृभूमि पर न्योछावर उन सभी जवानों को नमन करता हूं। आतंकवाद हो या विस्तारवाद भारत आज डटकर मुकाबला कर रहा है। आज दुनिया का भारत पर विश्वास और मजबूत हुआ है।’



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