सांसदों के वेतन में 30 फीसदी कटौती वाली बिल मंगलवार को लोकसभा में पास हो गया। कोरोना वायरस के व्यापक दुष्प्रभाव के चलते केन्द्रीय कैबिनेट ने अपैल महीने में प्रधानमंत्री समेत सभी केन्द्रीय मंत्रियों और सांसदों की सैलरी में 30 फीसदी की कटौती करने का फैसला लिया था और यह कटौती एक साल तक रहेगी।
इसके साथ ही, सांसदों को मिलने वाले एमपी लैड फंड पर भी दो साल के लिए अस्थाई रोक लगाई गई है। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया था कि कैबिनेट ने भारत में कोविड 19 के प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के लिए 2020-21 और 2021-22 के लिए सांसदों को मिलने वाले एमपीलैड फंड को अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया है। 2 साल के लिए एमपीलैड फंड के 7900 करोड़ रुपए का उपयोग भारत की संचित निधि में किया जाएगा।
हालांकि, केन्द्र के इस फैसले का काफी विरोध हुआ था। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सांसदों के 2 साल तक तक एमपी लैड फंड के अस्थाई रोक पर सरकार को आगाह करते हुए कहा था कि सरकार को अपने इस फैसले को दोबारा विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि केन्द्र की तरफ से प्रधानमंत्री, मंत्रियों और सांसदों के वेतन में 30 फीसदी कटौती करने का फैसला स्वागत योग्य कदम है। देश में महामारी से जूझ रही जनता के सामने यह एकता दिखाने का अच्छा रास्ता है। लेकिन, अध्यादेश लाकर दो साल तक सांसद के एमपी लैड के पैसे को रोकना और उसे केन्द्र की तरफ से बनाए गए फंड में डालना यह समस्या खड़ा करनेवाला कदम है।







