सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल के अक्सर आरोप लगते रहते है लेकिन इस बार चुनाव आयोग इसको लेकर सख्ती के मूड में है। राजनीतिक दलों की तरफ से पिछले दिनों इसको लेकर कार्रवाई की भी मांग की गई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शुक्रवार को कहा कि बिहार चुनाव को देखते हुए अगर कोई गलत पोस्ट डालता है और फौरन उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इसके लिए जिम्मेदार होगा।

अरोड़ा ने कहा, “हाल के दिनों में सोशल मीडिया का गलत उपयोग एक चुनौती बनकर सामने आया है। अगर सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाते हैं और फौरन व कार्रवाई नहीं की जाती है तो सोशल मीडिया को इसके लिए जम्मेदार ठहराया जाएगा।”

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से भी कहा कि वे अपने प्रतिनिधियों से इसकी संवेदनशीलता के बारे बताएं कि वे ऐसे ‘दुर्भावना, दुर्भावनापूर्ण प्रचार और अभद्र भाषा का इस्तेमाल’ न करें, क्योंकि ऐसे मामलों को सख्ती के साथ निपटा जाएगा। अरोड़ा ने कहा, “आयोग यह स्पष्ट करना चाहेगा कि चुनावी फायदे के लिए कोई भी अगर ऐसे प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल करता है, जैसे साम्प्रदायिक तनाव आदि तो यहां के कानून के हिसाब से उसे परिणाम भुगतना होगा।”

कोड के अनुसार, “हालांकि प्रतिभागी अपनी पहचान इस रूप में देते हैं कि वे न तो लेखक हैं और न ही ऐसी सामग्री के प्रकाशक हैं, लेकिन वे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और अखंडता को बढ़ावा देकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मदद को लेकर प्रतिबद्ध हैं।”

सहयोगी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स ने फेसबुक और व्हाट्सएप से टिप्पणी के लिए उन तक पहुंचा लेकिन खबर पब्लिश होने तक उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। ट्विटर ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।



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