हाइलाइट्स:
- एलएसी पर पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव को कम करने के लिए भारत-चीन में जारी है बातचीत का सिलसिला
- कोर कमांडर मीटिंग में किस तरह से डिसइंगेजमेंट करना है इस पर बातचीत
- बैठक को भारत की तरफ से 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे लीड
- एलएसी पर अपनी तैयारियों को लगातार मजबूत करने में जुटा है चीन
ईस्टर्न लद्दाख में एलएसी पर तनाव (India China tension at LAC) कम करने के लिए भारत और चीन के बीच आज सातवें दौर की बैठक होगी। कोर कमांडर मीटिंग (India China Core Commander Meet) में किस तरह से डिसइंगेजमेंट करना है और सैनिकों को पीछे भेजना है इस पर बात होगी। भारत की ओर से चीन पर जल्द से जल्द सैनिकों को वापस बुलाने के लिए दबाव बनाएगा। चीन के लद्दाख यूनियन टेरिटरी को मान्यता न देने के बयान के बाद यह पहली सीनियर मिलिट्री स्तर की मीटिंग है। दोनों देशों के बीच ईस्टर्न लद्दाख में एलएसी पर पिछले कुछ महीने से गतिरोध चल रहा है।
भारत-चीन के बीच सातवें दौर की कमांडर मीटिंग
यह आखिरी कोर कमांडर मीटिंग है जिसे भारत की तरफ से 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह लीड करेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि चंद दिनों में उनकी जगह लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन 14वीं कोर की कमान संभाल लेंगे। मेनन छठे राउंड की कोर कमांडर मीटिंग में भी मौजूद थे। उस मीटिंग में पहली बार विदेश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी भी थे। उस बैठक में पहली बार कोर कमांडर मीटिंग के बाद दोनों देशों ने ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया था और कहा था कि दोनों देश इस पर राजी हुए हैं कि फ्रंट लाइन में और सैनिकों को नहीं भेजा जाएगा। साथ ही जमीनी हालात में एकतरफा बदलाव की कोशिश नहीं की जाएगी।
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एलएसी पर लगातार अपनी तैयारी को मजबूत करने में जुटा है चीन
दरअसल, ऐसी जानकारी मिली है कि चीन लगातार एलएसी पर अपनी तैयारी को मजबूत करने में जुटा हुआ है। मिलिट्री बेस बनाया गया है, बड़ी संख्या में सैनिक और हथियारों को जुटाया है। इनमें टैंक, आर्टिलरी गन आदि शामिल हैं। मिलिट्री हॉस्पिटल के पास चीन हेलिपैड भी बना रहा है। इसका मकसद ये है कि किसी भी विपरीत परिस्थिति में घायल होने वाले अपने जवानों को चीन जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचा सके। हालांकि, चीन की इन हरकतों को ध्यान में रखते हुए भारत भी अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है, जिससे पड़ोसी मुल्क को उसी की तरह से जवाब दिया जा सके।
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तनाव कम करने के लिए भारत की चीन को दो टूक
हालांकि, ईस्टर्न लद्दाख में एलएसी पर तनाव कम करने के लिए दोनों देश के बीच लगातार बातचीत की जा रही है। हालांकि, चीन अब तक भी यह मानने को तैयार नहीं है कि वह पहले आगे आया। इस संबंध में एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, भारत चाहता है कि पूरे ईस्टर्न लद्दाख पर बात हो और देपसांग से शुरू होकर आखिर में पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चर्चा की जाए। दूसरी ओर चीन चाहता है कि सबसे पहले दक्षिणी किनारे पर ही बात हो।
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सैनिकों को वापस बुलाने के लिए चीन पर दबाव बनाएगा भारत
अधिकारी ने कहा कि भारत का साफ स्टैंड है कि हम ए टू जेड पूरे ईस्टर्न लद्दाख की बात करेंगे। उन्होंने बताया कि मई में जब चीन ने पैंगोंग एरिया में दिक्कत शुरू की, देपसांग की दिक्कत उससे काफी पहले की है, जहां चीन ने भारत के 4 पट्रोलिंग पॉइंट ब्लॉक किए हैं। अब जब बात हो रही है तो हम सब जगह पर बात कर रहे हैं। हम देपसांग से शुरू करेंगे और फिर पैंगोंग और दूसरी जगहों की बात होगी। चीन चाहता है कि पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर बात हो क्योंकि यहां पर भारतीय सेना ने मुखपरी, रिचांगला, रिचिंग ला की सभी अहम चोटियों पर कब्जा कर लिया है। चीन उसी से घबरा रहा है। उन्होंने कहा कि डीएस्केलेशन में जब बात होगी तो एयर ऐक्टिविटी में भी डीएस्केलेशन की बात होगी।







