बिहार में राजनीति गरमायी हुई है क्योंकि प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिये मतदान जारी हैं। पहले चरण के मतदान संपन्न् हो चुके हैं। दो चरण के मतदान होने हैं। 10 नवंबर को प्रदेश में नयी सरकार बनने के परिणाम आ जायेंगे। ऐसे ही दौर के लिये एक समाजवादी नेता ने एक बात कही थी कि जैसे तवे पे पड़ी रोटी को उलटते पलटते रहना चाहिये ताकि रोटी जले नहीं वैसे ही किसी एक दल की सत्ता ज्यादा समय तक नहीं रहनी चाहिये उसे भी बदलते रहना चाहिये ताकि सत्ताधारी दल बौरा न जाये। सत्ता को बपौती नहीं समझे। बिहार में नितीश कुमार से पहले आरजेडी प्रमुख लालू यादव व उनकी पत्नी ने 15 साल तक सत्ता का सुख भोगा था। आज भी लोग उनके शासन को याद कर के सहम जाते हैं।
बिहार के हालात बिलकुल ठीक वैसे ही हो गये हैं। पिछले 15 सालों से सत्ता का सुख नितीश कुमार ही भोग रहे हैं। नितीश बाबू अपने चौथे टर्न की उम्मीद से हैं। लेकिन उनके लिये इस बार चुनावी वैतरणी पार करना इतना असान नहीं दिख रहा है। राजद और कांग्रेस के साथ बामदल भी इस बार । मजबूती के साथ मुकाबले में डटे हुए हैं। 2005 से नितीश कुमार ने बिहार जेकी सत्ता संभाली हुई
है।। वर्तमान सीएम राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी है। सबसे पहले उनहोंने जार्ज फर्नांडीज को किनारे लगाया बाद में शरद यादव को भी पार्टी से चलता कर दिया। लेकिन इस बार उनका पाला विपक्ष साथ साथ बीजेपी के साथ पड़ा है। बीजेपी ने एनडीए शामिल लोजपा को अपनी बी टीम बना कर चुनाव मैदान में उतारा है। लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान एक तरफ मोदी को अपना राम बताते हुए खुद हनुमान बन गये हैं। चिराग अपनी जनसभाओं में नितीश कुमार पर जबरदस्त हमले कर रहे हैं। बीजेपी के कार्यकर्ताओं से अपने उम्मीदवारों के समर्थन की बात करते दिख रहे है। वहीं नितीश कुमार व जदयू के कैंडिडेट्स को हराने की बात कर रहे है। बीजेपी के बड़े नेता लोजपा को वोटकटुआ बता रहे हैं। एनडीए का हिस्सा न होने की बात कहते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी अब छह जन सभाएं व रैलियां कर चुके हैं। लेकिन मोदी प्रचार सभा व रैलियों में लोजपा के खिलाफ कोई भी टिप्पणी करने से बच रहे है। यह एक वजह है जिससे सीएम नितीश कुमार सबसे ज्यादा कसमसा रहे हैं।








