हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह के एक महिला पत्रकार ने सवालों के जरिये छक्के छुड़ाये यह ऐसा इंटरव्यू है जिससे तथाकथित बड़े पत्रकारों को भी सीख लेनी चाहिये। नामचीन टीवी चैनल्स और प्रिंट मीडिया के पत्रकार जिस तरह भीगी बिल्ली बन कर सहम सहम कर सवाल पूछते हैं जैसे वो पत्रकार नहीं बल्कि सत्ताधारी दल के नेता व सरकार के कुत्ते हैं। आजकल के पत्रकार जिम्मेदारी के नाम पर विपक्ष से सवाल पूछते हैं जो सत्ता से बाहर हैं।
श्री शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर हाल ही में गये थे। वहां उनसे एक पूर्व आईएएस महिला पत्रकार सुलोचना देवी ने खास बातचीत की। उस दौरान पूछे गये सवालों शाह काफी असहज हो गये। उनसे पहला सवाल यह पूछा गया कि केन्द्र सरकार हमेशा बंगाल सरकार पर ही हिंसा के बारे में जवाब मांगती है आप को भाजपा शासित राज्य यूपी, गुजरात, कर्नाटक और मध्यप्रदेश में राजनीतिक हिंसा और आपराधिक मामले नहीं दिखते। यूपी में सत्ताधारी दल का एक विधायक रेप केस में आरोपी पाया जाता है तो पूरी सरकार और पार्टी उसे बचाने में जुट जाते हैं। यूपी में ही एक दलित युवती के साथ सामूहिक रेप का मामला सामने आता है तो पूरी सरकार और पुलिस मिलकर इस मामले को दबाने में जुट जाते हैं जब मामला बढ़ा तो पुलिस और प्रशासन मिलकर युवती की लाश को बिना परिजनों की मौजूदगी में केरोसिन तेल डालकर फूंक देते है। वहां का लॉ एण्ड आर्डर पर आप योगी सरकार से सवाल नहीं करते है।
सीमा सुरक्षा और घुसपैठ के लिये आप राज्य सरकारों को जिम्मेदार कैसे मानते हैं जब कि बीएसएफ और अन्य सुरक्षा बल केन्द्र के अधीन रहते है। लव जिहाद पर कानून बनाने वाले राज्य सरकारों पर सवाल पूछने पर शाह सिर्फ ये कह कर पल्ला झाड़ते नजर आये कि प्रदेश में कानून और सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकारों की होती है इसके लिये कानून बनाने के लिये स्वतंत्र है। सवालों से झुझलाते हुए शाह ये कहते हैं कि आप इंटरव्यू के विषय से भटक रही हैं।
यूपी के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सूर्यप्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर इस खास बातचीत का एक वीडियो वीडियो शेयर करते हुए कहा कि पहले तो सवाल चम्मच में परोस कर दिये जाते थे लेकिन इस निडर और सच्चे पत्रकार ने शाह को झुंझलाने पर मजबूर कर दिया।








