फेसबुक (Facebook) को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका में प्रतिस्पर्धा पर नजर रखने वाली सरकारी एजेंसी फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) और 40 से ज्यादा अमेरिकी स्टेट्स ने सोशल मीडिया कंपनी के खिलाफ 2 मुकदमे किए हैं। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म फेसबुक के खिलाफ किए गए इन 2 प्रतिस्पर्धा रोकने वाले मुकदमों में कहा गया है कि उसने प्रतिस्पर्धियों को खरीदने के लिए ‘बिक जाओ या मिट जाओ’ की स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल किया है।
मोनोपली पावर इस्तेमाल करने का आरोप
फेसबुक पर आरोप लगाया गया है उसने अपने प्रतिस्पर्धियों को दबाने और उन्हें खत्म करने के लिए मोनोपली पावर (एकाधिकार शक्ति) का इस्तेमाल किया। फेसबुक को अगर इन मामलों में हार का सामना करना पड़ता है तो उसे पॉप्युलर मेसेजिंग प्लैटफॉर्म वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम बेचना पड़ सकता है। 2 मुकदमे दर्ज होने के साथ ही फेसबुक (Facebook) दूसरी दिग्गज टेक कंपनी बन गई है, जिसे इस साल बड़ी कानूनी चुनौती का सामना करना होगा। अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने इस साल अक्टूबर में अल्फाबेट इंक की कंपनी गूगल पर मुकदमा किया है। गूगल पर अपने प्रतिस्पर्धियों को दबाने के लिए अपने मार्केट पावर इस्तेमाल करने का आरोप है।
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पहले किए गए अधिग्रहण सौदों पर उठे सवाल
फेसबुक पर मुकदमा करने वाले पक्ष का कहना है कि सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के स्ट्रैटेजिक ऐक्विजिशन (रणनीतिक अधिग्रहण) प्रतिस्पर्धा के नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसमें खासतौर से साल 2012 में फोटो शेयरिंग ऐप Instagram का 1 अरब डॉलर में और साल 2014 में मेसेजिंग ऐप वॉट्सऐप का 19 अरब डॉलर में किए गए अधिग्रहण पर फोकस किया गया है। फेडरल और स्टेट रेगुलेटर्स का कहना है कि इन अधिग्रहण सौदों की पर्तें खुलनी चाहिए।
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46 स्टेट्स के गठबंधन की तरफ से न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने कहा, ‘करीब एक दशक तक फेसबुक ने छोटे प्रतिस्पर्धियों को कुचलने और कॉम्पिटिशन खत्म करने के लिए अपने दबदबे और एकाधिकार शक्ति का इस्तेमाल किया।’ जेम्स ने कहा कि फेसबुक ने प्रतिस्पर्धियों को उसके दबदबे के लिए खतरा बनने से पहले ही खरीद लिया। वहीं, Facebook की जनरल काउंसल जेनिफर न्यूस्टेड ने इन मुकदमों को ‘संशोधनवादी इतिहास’ कहा है। उन्होंने कहा कि वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम तब सफल हुए, जब फेसबुक ने इन ऐप्स को बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया।







