यूपी सरकार ने हाल ही में लव जिहाद पर प्रतिबंध लगाने के लिये एक कानून बनाया है। इस कानून के तहत शादी के लिये धर्मांतरण करने वालों को सजा के अलावा आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि यह कानून सिर्फ संप्रदाय विशेष को निशाना बनाने के लिये बनाया गया है। यूपी पुलिस बिना किसी छानबीन और सबूत को परखे ही युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज रहे है। यूपी में ऐसे कई मामले देखने को मिले है जिसमे हिन्दूवादी संगठन किसी भी शादी विवाह समारोह में पहुंच कर बाधा डालते हैं। इतना ही नहीं पुलिस भी इन संगठनों के इशारों पर युवकों और उनके परिजनों को हिरासत में लेकर पिटाई कर उनको जलील करते हैं। योगी सरकार ऐसे कई कारनामे कर चुकी है जिसमें उसकी बड़ी फजीहत हुई।
20 नवंबर 2020 में बने कानून के मुताबिकए ज़बरदस्ती प्रलोभन से किया गया धर्म परिवर्तन संज्ञेय और गैर जमानती अपराध होगा। इस कानून को तोड़ने पर कम से कम 15 हज़ार रुपये जुर्माना और एक से पांच साल तक की सज़ा होगीण् यही काम नाबालिग या अनुसूचित जाति या जनजाति की लड़की के साथ करने में कम से कम 25 हज़ार रुपये जुर्माना और 3 से दस साल तक की सज़ा होगी।
यूपी में लव जिहाद कानून बनने के बाद बीजेपी शासित प्रदेशों मध्य प्रदेश, गुजारात, कर्नाटक में भी इसी तर्ज पर कानून बनाने की कवायद तेज हो गयी है। यूपी में इस कानून के बनते ही आधा दर्जन मामले दर्ज किये जा चुके हैं। नोबल पुरस्कार विजेता अमत्र्यसेन ने इस विषय पर एक धारदार बयान दिया है उन्होंने कहा कि लव जिहाद कानून मानवाधिकार का हनन है इस पर सुप्रीमकोर्ट को दखल देना चाहिये। यह बिल्कुल निजी मामला हैं। लव है वहां जिहाद नहीं है। प्यार करना बहुत ही निजी मामला है इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। जिहाद के नाम पर कानून बनना बहुत ही चिताजनक है। आप किसी भी धर्म के व्यक्ति के साथ प्यार कर सकते है प्यार करना कोई जिहाद नहीं है। ऐसे में किसी धर्म को छोड़ने और अपनाने में कोई बुराई नहीं है। ऐसे में में देश की अदालतों से उम्मीद है कि वो ऐसे कानून पर कार्रवाई करेंगी। लव जिहाद जैसे कानून भारतीय संस्कृति पर प्रहार है।








