यूपी में प्रदेश सरकार और कांग्रेस के बीच बयानों का दौर चल रहा है। प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिये कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार से 1000 बसें चलाने के लिये अनुमति मांगी थी। पहले तो सरकार ने हीला हवाली दिखाई बाद में सरकार ने मंजूरी दी और कांग्रेस से बसों के चाालक कंडक्टर और बसों के नंबर आदि मांगे। कांग्रेस की ओर से सरकार को लगभग साढ़े ग्यारह सै बसों के नंबर सौंप दिये। सरकार के अधिकारियों ने कांग्रेस पर यह आरोप लगाये कि जो बसों के नंबर उनमें कुछ नंंबर आटो, स्कूटर और मेटाडोर के निकले हैं। इस बात को लेकर अधिकारियों ने उप्र कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। इतना ही नहीं पुलिस ने अजय कुमार और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस महासचिव ने सीएम योगी से सियासत न करने की अपील की है। लेकिन सरकारी अफसर इस बात पर भी कोई न कोई पेंच फंसाने से बाज नही आ रहे हैं। लेकिन इसका फायदा कांग्रेस उठाने के लिये काफी सक्रिय दिख रही है
ये देखा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद कांग्रेस अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है। प्रदेश का नेतृत्व सीधे तौर पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ले रखा है। वो प्रदेश कांग्रेस में जान फूंकने के लिये काफी सक्रिय हो गयी हैं। इससे न केवल योगी सरकार बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के लिये भी परेशानी का सबब बन गयी हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती अक्सर यूपी में प्रियंका गांधी की यूपी में सक्रियता पर कटाक्ष करती रहती हैं।
सरकार के इस रवैये से नाराज उप्र कांग्रेस अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसी नेता ने प्रदेश सरकार पर बसों को लेकर सियासत करने का आरोप लगाया है। सरकार ऐसे वकत् पर भी राजनीति कर रही है जब कि प्रवासी मजदूर सड़कों पर भूख और गर्मी का प्रकोप झेल रहे है।
पूरे देश में लॉक डाउन होने के कारण प्रवासी मजदूर अपने घरों को वापस आने को बेताब है। सैकड़ों किमी से वो लोग पैदल, साइकिल, आटो और ट्रकों से लाट रहे हैं। लेकिन प्रदेश सरकारों ने उन्हें सीमा पर ही रोक रखा है। ऐसे में प्रवासी मजदूर सड़कों पर भूखे मरने की हालत में पहुंच गये है। सरकारों के दावे खोखले हो रहे है कि वो मजदूरों को हर संभव मदद कर रहे हैं। लेकिन सड़क हादसे उनके दावों की हवा निकाल रहे हैं। पूरे देश में मजदूरों की मौतें सड़क हादसों में हो रही हैं।








