नई दिल्ली: संसद में आर्थिक समीक्षा पेश कर दी गई है. आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए वेतन और करियर की प्रगति, बेहतर कार्य के लिए प्रोत्साहन और सामाजिक सुरक्षा लाभ की जरूरत है, ताकि भारत में कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जा सके.

ऐसा देखा गया है कि एक महिला एक पुरुष की तुलना में अवैतनिक घरेलू सेवाओं और घर के सदस्यों की देखभाल का काम अधिक करती है. वहीं आर्थिक सर्वे 2020-21 के मुताबिक 2018-19 में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों उत्पादक आयु (15-59 वर्ष) वर्ग के श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी 26.5 प्रतिशत थी जबकि पुरुषों के संबंध में यह आंकड़ा 80.3 प्रतिशत था.

दिया सुझाव

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए गए आर्थिक सर्वे में सुझाव दिया गया ‘अधिक महिलाओं को कार्यबल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सस्ती और अच्छी बाल देखभाल सुविधाओं के लिए संस्थागत निवेश, पितृत्व अवकाश, परिवार के अनुकूल कार्य वातावरण और बुजुर्गों की देखभाल के लिए मदद की जरूरत है.’

सर्वे में कहा गया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए वेतन और करियर की प्रगति, बेहतर कार्य के लिए प्रोत्साहन और सामाजिक सुरक्षा लाभ की जरूरत है. सर्वे के मुताबिक घरेलू कामों में महिलाओं की भागीदारी 2018-19 में ग्रामीण क्षेत्रों में 55.7 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 59.1 प्रतिशत थी.

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