वित्त वर्ष 2021-22 के लिए केंद्रीय बजट पेश करने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से जुड़ीं दो खासियतें बताईं। उन्होंने बताया कि इस बजट के जरिए हमने इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी खर्च करने को चुना है, जोकि- सड़कों, बिजली उत्पादन, पुलों, बंदरगाहों आदि तक फैला हुआ है। वहीं, बजट की दूसरी विशेषता हेल्थकेयर सेक्टर है। उन्होंने कहा कि जिस तरीके का पिछला साल बीता है,उससे बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन पर निवेश किए जाना जरूरी था।

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि यह बजट उस समय आया है जब हम सभी ने इकॉनमी में गति देने का फैसला किया और हमारा मानना है कि यदि मांग बढ़ाने के लिए जरूरी उपाय किए तो रफ्तार देखने को मिलेगी। उन्होंने दावा किया कि अब सरकारी खर्चे और राजस्व विवरणों का लेखा-जोखा बहुत अधिक पारदर्शी हो चुका है। उन्होंने बताया कि हमारा वित्तीय घाटा जो फरवरी 2020 के दौरान 3.5 प्रतिशत से शुरू हुआ था, जीडीपी के 9.5 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इसलिए हमने खर्च और सिर्फ खर्च किया है। इसके साथ ही, हमने घाटे के प्रबंधन के लिए एक स्पष्ट रास्ता दिया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकास वित्तीय संस्थान (डीएफआई) लाया जा रहा है। इस डीएफआई का इस्तेमाल अगले 3-5 वर्षों में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये जुटाने के लिए किया जाएगा।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किया गया आम बजट हर क्षेत्र में ऑल राउंड विकास की बात करता है और इसके दिल में गांव और किसान हैं। बजट पेश किए जाने के बाद प्रधानमंत्री ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2021 का बजट असाधारण परिस्थितियों के बीच पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें यथार्थ का एहसास भी और विकास का विश्वास भी है। 

उन्होंने कहा कि इस बजट में देश में कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए और किसानों की आय बढ़ाने के लिए बहुत जोर दिया गया है। किसानों को आसानी से और ज्यादा ऋण मिल सकेगा। देश की मंडियों को और मजबूत करने के लिए प्रावधान किया गया है। ये सब निर्णय दिखाते हैं कि इस बजट के दिल में गांव हैं, हमारे किसान हैं।





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