सपा सांसद आजम खां का नाम लोकतंत्र सेनानियों की सूची से काट दिया है। सूची से नाम कटने के बाद अब हर माह बीस हजार रुपये के हिसाब से मिलने वाली सपा सांसद की पेंशन बंद हो गई है। शासन ने मौजूदा तिमाही के पेंशनधारकों की सूची इसी हफ्ते प्रशासन को भेजा है। समाजवादी पार्टी की सरकार में आपातकाल के दौरान जेल में बंद रहे मीसा बंदियों के लिए पेंशन योजना शुरू की थी। 2012 में इस योजना की शुरुआत हुई। इस दौरान सपा सांसद आजम खां समेत जिले में 37 लोगों को पेंशन के लिए चिन्हित किया गया था।
पहले दस हजार और फिर बाद में इस पेंशन को 15 हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया। योगी सरकार ने पेंशन की रकम बढ़ाते हुए इसे बीस हजार रुपये कर दिया था। यह पेंशन आजम खां समेत अन्य सभी 37 लोगों को मिल रही थी लेकिन अब आजम खां की पेंशन बंद कर दी गई है। सरकार की ओर से प्रशासन को भेजी गई लोकतंत्र सेनानियों की सूची में सपा सांसद का नाम नहीं है। एक अन्य व्यक्ति का निधन हो जाने के कारण उनका नाम भी काटा गया है। शासन की सूची के आधार पर अब प्रशासन ने 35 लोगों की पेंशन जारी कर दी है। बता दें कि सपा सांसद आजम खां धोखाधड़ी समेत करीब सौ से ज्यादा मामलों में इन दिनों जेल में बंद हैं।
15 साल में कई बार रुकी तो कई बार बढ़ी पेंशन की राशि
2005 में आपातकाल के दौरान जेल गए मीसा बंदियों को पेंशन के रूप में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने योजना की शुरुआत की थी। 2005 से पांच सौ रुपये प्रतिमाह देना शुरू किया था। इसके एक साल बाद इसे बढ़ाकर एक हजार किया गया था। वर्ष 2007 में मायावती की सरकार में इसे रोक दिया गया। फिर वर्ष 2012 में अखिलेश यादव की सरकार बनी तो पेंशन की रकम तीन हजार कर दी गई। एक साल बाद ही बढ़ाकर छह हजार और इसके एक साल बाद 10 हजार और फिर 15 हजार रुपये कर दी गई। वर्तमान में पेंशन की राशि 20 हजार रुपये है।







