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बिहार में जेडीयू और भाजपा का गठबंधन टूटे ज्यादा दिन नहीं हुए हैं कि भाजपा ने जेडीयू के 5 विधायकों को तोड़ लिया है। इससे नितीश कुमार काफी नाराज हैं। इससे पहले भी भाजपा ने 2020 में भी जेडीयू के छह में से पांच विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर झटका दिया था। उस बात को नितीश कुमार भूले नहीं हैं कि बीजेपी ने एक और बड़ा झटका दे दिया है। नितीश कुमार इस झटके से काफी उत्तेजित दिख रहे हैं। यह बात जग जाहिर है कि सुशासन बाबू किसी भी बात को भूलते नहीं है। मन में गांठ बांध कर रखते हैं। इस बात को लेकर बिहार के ही भाजपा सांसद व पूर्व उप मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि मणिपुर में जेडीयू के पाचं विधायकों ने पार्टी छोड़ बीजेपी ज्वाइन कर लिया है। बहुत जल्द ही लालू प्रसाद जी बिहार से जेडीयू को भी साफ कर देंगे। इस बात पर जेडीयू के अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी ने वो गठबंधन धर्म में विश्वासघात किया है। मणिपुर में मिशन4बीजेपी के लिये पीएम ने 45 रैलियां और सभाएं की तब जाकर 53 सीटें जीत पाये थे। और रही बात अरुणाचल व मणिपुर में विधायकों की पार्टी बदलने की वहां बीजेपी ने धन बल और जांच एजेंसियांे का भय दिखा कर बेजा दबाव डाला है।
2024 में भाजपा का बिहार में वो हाल होने वाला है कि यहां से बीजेपी का सफाया होने वाला है। यह बात लिख कर रख लीजिये। जब बिहार में जेडीयू एनडीए का गठबंधन था तब सुशील मोदी नितीश कुमार के खास मित्रों में होते थे। लेकिन गठबंधन खत्म होते ही उनके सुर बिगड़ गये हैं। यह बात सुशील मोदी भी जानते हें कि बिहार को लेकर भाजपा में काफी चिंता की जा रही है। नितीश कुमार ने जो मास्टर कांर्ड खेला है उसके बीजेपी के चाणक्य भी नहीं समझ पा रहे हैं कि इसकी क्या काट हो सकती है।
शुक्रवार को मणिपुर में जेडीयू के पांच विधायकों ने एक साथ पाला बदल कर बीजेपी का दामन थाम लिया। विधानसभा स्पीकर ने यह कह कर उन्हें बीजेपी की सदस्यता दिलायी कि कुल विधायकों की संख्या 6 है और बीजेपी में शामिल होने वाले पांच विधायकों ने पार्टी छोड़ी है। इस लिये विधायकों पर दल बदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा।
2020 में जेडीयू के छह विधायकों ने अरुणाचल में बीजेपी की सदस्यता ली थी। वहां बीजेपी के समर्थन से ही सरकार चल रही थी। अरुणाचल विधानसभा स्पीकर ने यह कहा कि जेडीयू के सात में से छह विधायकों ने पार्टी छोड़ते हुए बीजेपी को समर्थन देते हुए पार्टी छोड़ी थी। उन पर भी दल बदल विरोधी कानून लागू नहीं हुआ था। उस समय भी नितीश कुमार तिलमिला कर रह गये थे।

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