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टीएमसी को भी तोड़ने की आशंका
बिहार महाराष्ट्र और जेडीयू के बाद भाजपा को एक और विभीषण की तलाश है। पहले बिहार में भाजपा ने जेडीयू में सीआरपी सिंह के रूप में घात लगाने की कोशिश की लेकिन घाघ नितीश कुमार के आगे उनकी नहीं चली और नितीश कुमार की पार्टी टूटने से बच गयी। वो बीजेपी व सीआरपी सिंह की मंशा को समझ गये और उन्हें पार्टी से किनारे लगा दिया।

Mamata DiDi has decided to make distance from INDAI Alliance and denied sharing with Congress
Mamata DiDi has decided to make distance from INDAI Alliance and denied sharing with Congress

बाद में मोदी सरकार ने आरसीपी सिंह को दरकिनार करते हुए दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेंका। उनकी स्थिति धोबी के कुत्ते न घाट की हो गयी। जेडीयू में एक समय उनकी तूती बोलती थी। लेकिन आजकल राजनीति में कोई उनको पूछ रहा है। ऐसे में वो अपना एक राजनीतिक दल बनाये हैं।
लोजपा को भाजपा और जेडीयू ने तुड़ावाया
वहीं लोजपा को तोड़ने भाजपा को सफलता मिल गयी वहां चाचा भतीजे को एक दूसरे के सामने खड़ा पार्टी को तुड़वा दिया। दिलचस्प बात यह है लोजपा के संस्थापक रामबिलास पासवान एनडीए के घटक दल थे और मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। 2021 में रामबिलास पासवान की मौत बिहार विधानसभा चुनाव के कुछ समय पहले हो गयी थी। उसके बाद लोजपा की कमान चिराग पासवान के हाथों में आ गयी। ये बात शायद उनके चचा पशुपति नाथ पारस को गवारा नहीं हुई। 2021 के विधानसभा चुनाव में नितीश कुमार एनडीए के घटक दल थे। बिहार में लोजपा विधानसभा चुनाव में एनडीए का सदस्य नहीं था। लेकिन लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान ने ऐसी जगह उम्मीदवार खड़े किये जहां नितीश कुमार के उम्मीद थे। वो सभी चुनाव सभा और प्रचार में यही कहते कि मोदी से बैर नहीं नितीश तेरी खैर नहीं। चिराग पासवान हर मीटिंग और चुनावी सभा में मोदी को राम कहते और खुद को उनका हनुमान कहते थे। बावजूद इसके भाजपा ने नितीश कुमार के साथ मिल कर लोजपा में देा फाड़ करा दिये। इसके बावजूद चिराग पासवान को भाजपा की मंशा बता नहं चली। भाजपा ने चिराग पासवान पशुपति पारस को अपने साथ मिला लिया और चुनाव आयोग की मदद से उसके दल को असली लोजपा का मालिक बनवा दिया। पशुपति पारस के साथ चार और सांसद थे। पारस को लोजपा कोटे से केन्द्र में मंत्री बना दिया। इस तरह चिराग पासवान सड़क पर आ गये। केन्द्र सरकार ने रामबिलास पासवान को आवंटित बंगले को भी खाली करवा लिया।
बीजेपी का अगला निशाना प बंगाल
पिछले दस साल से मोदी शाह की दाल प बगाल में नहीं गल पा रही है। वहां ममता बनर्जी अभी तक अजेय नेता वहा रूप में दिख रही हैं। वहां बीेजेपी को एकनाथ शिंदे, अजित पवार या आरसीपी सिंह की तलाश है। कुछ लोगों का कहना है कि भाजपा प बंगाल मेें एक पार्टी बनाने की है जो लोकल होते हुए भाजपा के इशारे पर काम करेगी। प बंगाल के पत्रकार प्रसून आर्चाय ने दीपक शर्मा के शो में यह खुलासा किया है कि टीएमसी सांसदअभिषेक ब बनर्जी और सीएम ममता बनर्जी के बीच अनबन चल रही है।

ED eying on Dy CM Tejasvi Yadav and TMC MP Abhishek Banerjee
Is TMC MP Abhishek banerjjee unhappy with CM Mamta banerjee

इसी बात का फायदा बीजेपी उठाना चाह रही है। वहां भी महाराष्ट्र की तर्ज पर टीएमसी को तोड़ने की साजिश की जा सकती है। इन सब में भाजपा को महारत हासिल है। बिहार में उसने लोजपा को तोड़ कर दो हिस्सों में बांट दिया था। यह भी चर्चा है कि प बंगाल में मोदी शाह ने अडाणी को इसी सोच के साथ ममता बनर्जी के साथ करीबी बढ़ाने को भेजा है। अडाणी को बांग्लादेश से झटका लगने के बाद प बंगाल को अपने बिजली संयंत्र को प बंगाल शिफ्ट करने की जरूरत है। इसलिये ममता बनर्जी से गौतम अडाणी मुलाकातें बढ़ गयी हैं। यह भी चर्चा है कि टीएमसी को तोड़ने के लिये भतीजे अभिषेक बनर्जी को साधने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल यह सब चर्चा में है इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन ऐसा होने की आशंका से इनकार नहीं की जा सकती है।
महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी को शिकार बनाया
2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने एक साथ चुनाव लड़ा और जीता भी लेकिन जब सीएम बनने की बात आयी तो भाजपा अपने नेता को सीएम बनाना चाहती थी। लेकिन शिवसेना इस बात पर अड़ गयी कि इस बार सीएम पद शिवसेना के नेता को मिलना चाहिये।

Udhav vs Modi
Shivsena Treats BJP and Modi govt. That Next CM would be from Shivsena

मामला इतना बढ़ गया कि दोनों का पचास साल पुराना रिश्ता टूट गया। शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ महाविकास अघाड़ी की सरकार बना ली जिसके सीएम उद्धव ठाकरे को बनाया गया। ये बात पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को हजम नहीं हो रही थी। वो किसी न किसी तरह प्रदेश में मुख्यमंत्री बनना चाह रहे थे। इत्तेफाक से शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे अपने तीन दर्जन विधायकों और सासंदों के साथ बगावत करने को तैयार हो गये। इस प्रकार शिवसेना को तोड़ कर महाविकास अघाड़ी को गिरवाया गया। बाद में वहां एक बार फिर से भाजपा और शिवसेना शिंदे की सरकार बन गयी लेकिन सीएम पद ए​कनाथ शिंदे को दिया गया। इस सरकार पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस को डिप्टी सीएम बनाया गया।

Modi Shah & BJP is feeling trouble in Maharashtra politics
Modi Shah & BJP is feeling trouble in Maharashtra politics

शरद पवार को भी भाजपा ने ठगा
2023 में एक बार फिर भाजपा ने महाराष्ट्र एक ओर पार्टी को अपनी साजिश का शिकार बनाया। शरद पवार के भतीजे अजित पवार को अपनी साजिश का शिकार बनाते हुए शरद पवार की पार्टी एनसीपी को भी दो हिस्सों में बंटवा दिया। यहां भी चुनाव आयोग ने केन्द्र सरकार की शह पर अजित पवार की पार्टी को असली एनसीपी का दर्जा दिला कर उसका चुनाव चिह्नि और झण्डा भी अजित पवार की एनसीपी को मिल गया। इस प्रकार चचा शरद पवार को भतीजे ने ही धूल चटवा दी।

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