#Gen. Election 2024# Modi Govt.# BJP#PM MOdi# NDA# Congress# Rahul Gandhi# Bharat Jodo Yatra# Akhilesh Yadav# Jayant Chowdhery# Mayawati# Mamta Banerjee# Shaivsena# NCP# Regional Parties#

एक साल के भीतर देश में 10 प्रदेशों के चुनाव होने हैं। इसके अलावा आम चुनाव भी 2024 में होने है। यह तो तय है कि ये विधानसभाओं चुनाव के परिणाम आने वाली सरकार के भविष्य को तय करेंगे। वैसे तो भाजपा के हौसले गुजरात और यूपी चुनाव के परिणाम से गदगद है। गुजरात तो भाजपा को ऐतिहासिक जीत हासिल की है। लेकिन चिंता की बात यह है कि दिल्ली एमसीडी और हिमाचल में भाजपा को सत्ता खोनी पड़ी है। इसको देखते हुए ये माना जा रहा है कि आने वाले आम चुनाव में भाजपा को इतनी आसानी से जीत हाथ नहीं लगने वाली है। यह तो तय है कि आगामी आम चुनाव कांग्रेस और भाजपा का निर्णायक चुनाव होगा। राजनीति के पंडितों की माने तो एनडीए लगभग पचास फीसद सीटों को नुकसान होने की आशंका है।
मोदी राज में नफरत और सांप्रदायिकता का इजाफा
यह धारण बन रही है कि जब से मोदी सरकार सत्ता में आयी है सामाजिक ताना बाना और समरसता खत्म होती जा रही है। सांप्रदायिकता का जहर समाज में दिन ब दिन घुलता ही जा रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का असर विधानसभा चुनावों देखने को मिलेगा। कन्या कुमारी से शुरू हुई इस यात्रा ने 3000 किमी से अधिक दूरी तय कर ली है। इस यात्रा नेतृत्व राहुल गांधी कर रहे हैं। राहुल गांधी यात्रा के दौरान सभी जगह यह कह रहे हैं इस यात्रा का उद्देश्य समाज में फैल रही नफरत और विभाजन कारी ताकत को कमजोर करना है ताकि सामाजिक सौहार्द बरकार रहे। नफरत के बाजार में वो मोहब्बत की दुकान खोलना चाह रहे हैं।
दक्षिण भारत में बीजेपी का स्कोप नहीं
अल्पसंख्यक समुदाय ईसाई और मुस्लिम समाज के प्रति हिंसात्मक घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है। इस बात का अगले आम चुनाव में असर देखा जा सकता है। एक साल के भीतर राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम, नागालैंड, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र पदेश,मेघालय और जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने हैं। मध्यप्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक में भाजपा की सरकारें हैं। लेकिन इन तीनों प्रदेशों में हालात सरकार के अच्छे नहीं हैं। दक्षिण भारतीय प्रदेशों में भाजपा का कोई स्कोप नहीं दिख रहा है। उसका बड़ा कारण है कि वहां उनका हिन्दू मुस्लिम और पाकिस्तान जैसे मुद्दे चल नहीं पाते हैं। प. बंगाल में वैसे भी ममता दीदी के आगे बीजेपी दाल नहीं गली और ममता बनर्जी में तीसरी बार शानदार सीएम पद संभाल लिया। वहां भी इस बार भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विपक्ष को हल्के में न ले बीजेपी
2019 के आम चुनाव में एनडीए में नितीश कुमार, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, पीडीपी, टीडीपी और अकाली दल शामिल थे। लेकिन आज के समय में यह सभी उनके विरोध में हो गये हैं। इसे एनडीए खासतौर से बीजेपी को हल्के में नहीं लेना चाहिये। शिवसेना और जेडीयू एनडीए के काफी पुराने और मजबूत घटक माने जाते थे। लेकिन हाल की राजनीतिक परिवेश में ये दोनों ही दल भाजपा के धुर विरोधी बन गये हैं। दोनों को ही भाजपा की साजिश का शिकार होना पड़ा है। भाजपा के लिये यह बात जग जाहिर हो गयी है कि वो अपने गठबंधन के दलों को भी ठगने से बाज नहीं आते हैं। एनडीए का प्रमुख घटक दल होने के बावजूद बीजेपी ने मणिपुर और अरुयणाचल में जेडीय के एक दर्जन विधायकों को बीजेपी ने प्रलोभन दे कर अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। भाजपा की इस हरकत से नितीश कुमार के तनबदन में आग लग गयी। लेकिन उस वक्त वो नाराजगी को जता नहीं सके। लेकिन इसके बावजूद भाजपा ने उनकी इस खामोशी को उनकी कमजोरी समझा। भाजपा ने नितीश कुमार और उनकी पार्टी को कमजोर करने के लिये उनकी ही पार्टी के दिग्गज नेता आरसीपी सिंह को तोड़ लिया। इतना ही नहीं आरसीपी सिंह को नितीश कुमार को बिना जानकारी के मोदी कैबिनेट में मंत्री बना लिया। इससे नितीश कुमार को और भी मिर्च लग गयी। नितीश कुमार ने इस बार आरसीपी को राज्यसभा का टिकट नहीं दिया। इससे आरसीपी का मंत्री पद छिन गया। साथ ही भाजपा ने आरसीपी सिंह को भी पैदल कर दिया है। आरसीपी सिंह न घर के रहे और न ही घाट के।
सत्ता के लिये भाजपा ने शिवसेना को धोखा दिया
महाराष्ट्र में भी भाजपा ने सत्ता के लिये 25 साल पुराना शिवसेना से गठबंधन तोड़ दिया। सीएम पद के लिये शिवसेना और भाजपा के बीच खाई बढ़ गयी। शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार का गठन कर लिया। भाजपा को यह बात फूटी आंख नही सुहाई और वो सरकार को गिराने की साजिश रचने में जुट गयी। आखिरकार भाजपा ने 2022 में मौका पाकर महाविकास अघाड़ी की सरकार को गिरवा दिया। पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना नेता और सरकार में मंत्री एकनाथ शिंदे को विश्वास में लेकर बगावत करने को कहा। शिंदे ने अपने 40 विधायकों समेत सरकार से समर्थन वापस लिया और बीजेपी के समर्थन महाराष्ट्र में सरकार बना ली। ऐसे में अगर लोकसभा चुनाव की बात करें तो लगभग 15 प्रदेशों में भाजपा के हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। यह भी चर्चा मे है कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को मुश्किल से सौ सवा सौ सीट ही मिल पायेंगी।








