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मोदी शाह अजित पवार के बिछाये जाल में फंस जाते हैं
यह पहली बार हुआ है कि बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह को किसी ने मामू बना दिया है। कहां तो शाह अपनी चालों और साजिशों के लिये कुख्यात हैं लेकिन महाराष्ट्र में एक ऐसा भतीजा है जिसने मोदी शाह को पानी पिला दिया है। हर बार मोदी शाह अजित पवार के बिछाये जाल में फंस जाते हैं और मुंह की खानी पड़ती है। महाराष्ट्र में राजनीतिक तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले डेढ़ दो साल से प्रदेश में सरकार की अस्थिरता देखी जा रही है। पहले महाविकास अघाड़ी की सरकार गिराने की साजिश उसके बाद शिवसेना को तोड़ने का षडयंत्र फिर भाजपा और शिंदे गुट की मिलीभगत से प्रदेश में सरकार बनी। फिर एक बार सरकार पर संकट के बादल दिखने लगे हैं। एकनाथ शिंदे व उनके 16 विधायकों पर गाज गिरने की आशंका दिख रही है।

इस बीच में बीजेपी ने महाराष्ट्र की एक और पार्टी एनसीपी को भी तोड़ लिया और सरकार में शामिल कर लिया। लेकिन तब उन्हें नहीं पता था कि वो एक जटिल परेशानी को अपनी सरकार में शामिल कर रहे हैं। अजित पवार ने धीरे धीरे अपने पत्ते खोलना शुरू किये है। इससे भाजपा का पूरा समीकरण ही बिगड़ने लगा है। प्रदेश में विधानसभा के साथ अगले साल आम चुनाव भी होने हैं। लेकिन भाजपा की हालत दिन ब दिन बदहाल होती जा रही है। दिलचस्प यह है कि अजित पवार पहले भी 2019 में भाजपा के साथ दांव चल चुके हैं। राज्यपाल कोश्यारी ने देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व ने सरकार के सीएम और मत्रियों को गोपनीयता की शपथ दिलवायी थी। तब भी अजित पवार पल्टी मार कर वापस चले गये और सरकार अमान्य हो गयी थी। चर्चा तो यह भी चल रही है कि अजित पवार का भाजपा सरकार में शामिल होना एक साजिश था। उन्हें और उनके परिवार के लोगों को ईडी और सीबीआई परेशान कर रही थी उससे छुटकारा पाने के लिये उन्होंने चाल के तहत सरकार शामिल होना तय किया। सरकार में शामिल होते उनके परिवार और उनका नाम ईडी ने चार्जशीट से बाहर कर दिया। अब उन्हें इनसे डरने की बात नहीं रह गयी है। ठीक आम चुनाव से पहले अजित पवार सरकार से पिंड छुड़ा लेंगे।
अजित पवार ने उड़ाये बीजेपी के होश
बीजेपी ने कुछ दिनों पहले एनसीपी नेता अजित पवार को सरकार में शामिल कर उन्हें सरकार में उपमुख्यमंत्री पद सौंप दिया। कुछ दिनों बाद ही अजित ने केन्द्र और प्रदेश सरकार को अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिये। पहले मराठा आरक्षण को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हुए पुलिस के लाठीचार्ज का विरोध किया इस पर देवेंद्र फडणवीस को माफी तक मांगनी पड़ी थी। उसमे भाजपा की किरकिरी हुई। वैसे देवेंद्र फडणवीस की सीएम शिंदे से भी नहीं पट रही थी अब अजित पवार उनके लिये एक और समस्या बन कर उबर रहे हैं। ताजा मामला मुसलमानों के लिये 5 फीसद आरक्षण की मांग को लेकर खड़ा हुआ है। अजित पवार ने सरकार के आगे ये मांग रखी है कि प्रदेश में मुस्लिम समाज के लिये भी पांच प्रतिशत आरक्षण किया जाये। उन्होंने सरकार में मंत्री अब्दुल सत्तार और हसन मुश्रीम से इस मामले में मुलाकात भी करी है।
शाह और देवेंद्र की इज्जत दांव पर
ये बात सबको मालूम है कि बीजेपी और शाह ने मुस्लिम आरक्षण का हमेशा विरोध किया है। कर्नाटक में ठीक चुनाव के पहले बीजेपी सरकार ने मुसलमानों को मिलने वाले चार प्रतिशत आरक्षण को बिल ला कर खत्म कर दिया था। लेकिन महाराष्ट्र में बिल्कुल उल्टा हो रहा है सरकार का उपमुख्यमंत्री ही मुस्लिम समाज के लिये पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहा है। इससे तो बीजेपी के मंसूबों पर पानी फिर जायेगा। उनका हिन्दुत्व वाला मसला पचड़े में पड़ जायेगा।








