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इस बात की काफी चर्चा हो रही है कि वर्तमान सीजीआई डीवाई चंद्रचूड मोदी सरकार का रास नहीं आ रही है। मौजूदा सीजेआई के कुछ फैसलों से मोदी सरकार काफी परेशान हो रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई ने मुख्य चुनाव आयुक्त, सीबीआई निदेशक, महाराष्ट्र सरकार—शिवसेना विवाद और अडानी मामले में सरकार की मंशा के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिये है। ताजा मामला सेना के वन रैंक वन पेंशन मामले में भी सरकार के खिलाफ जा कर आदेश जारी किये हैं। इससे चिढ़कर बीजेपी ट्रोल विंग सीजेआई को सोशल मीडिया पर कोसने में लगी है। लोगों में चर्चा है कि ऐसा बेबाक, इंसाफ पसंद और बिना किसी दबाव के फैसले लेने वाला सीजेआई काफी समय बाद देखने को मिल रहा है जो सरकार की कठपुतली नहीं है। सरकार व प्रधानमंत्री को भी आदेश देने में निर्भीक है।
कुछ समय तक देखा गया कि इनसे पहले के सीजेआई केन्द्र सरकार की सहूलियत को ध्यान में रख कर अपने निर्णय दिया करते थे। उनमें एक नाम रंजन गोगोई का भी आता है जिन्हें मोदी सरकार के रिटायर होने के कुछ दिनों बाद ही राज्यसभा का सदस्य बना दिया था। तभी लोगों ने बाबरी मस्जिद विवाद मामले के निर्णय पर उनकी भूमिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिये थे। राफेल खरीद व चुनावी बांड मामले पर दिये गये फैसलों को लेकर दीपक मिश्रा की काफी निंदा की गयी। इसी कड़ी में यूयू ललित का 76 दिन का कार्यकाल भी मोदी सरकार के पक्ष में दिखा। यह भी चर्चा में आया कि किसी समय में यूयू ललित गृहमंत्री अमित शाह के वकील रह चुके हैं। इस बात पर पूर्व सीजेआई ललित ने स्वीकारा कि वो शाह के वकीलों की टीम के हिस्सा रहे हैं। पूर्व सीजेआई एएस बोबड़े भी कुछ विवादों में रहे। उनमें एक मामला कोरोना काल में बिना हेल्मेट पहने बाइक चलाने का मामला था। सूत्र बताते हैं कि बोबड़े भाजपा नेता की विदेशी बाइक पर सवार थे। इस बात को लेकर उनकी काफी निंदा भी हुई थी।







