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लाख टके का सवाल है कि जब मोदी सरकार देश के आधा दर्जन प्रदेशों में रसोई गैस सिलेंडर 450 से 500 में दे सकती है तो देश सभी प्रदेशों में मोदी सरकार इस दाम पर रसोई गैस क्यों नहीं दे रही है। एक बात तो समझ में आ गयी है कि मोदी सराकर उन राज्यों में दामों में कमी ला कर वहां वोटों की राजनीति के लिये करती है। बाकी राज्यों में रह रही जनता को महंगे दामों में रसोई गैस खरीदनी पड़ती है। पिछले साढ़े नौ सालों में मोदी सरकार गैस के दाम 450 से बढ़ा कर 1200 सौ प्रति सिलेंडर तक कर दिये है। लोगों का मानना है कि मोदी सरकार दाम करने के नाम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के दामों का रोना रोने लगती है।

दूसरी पार्टी राहत दे तो मोदी सरकार और उसके मंत्री उसे रेवड़ी बताते हैं लेकिन खुद वहीं करें तो उसे मोदी की गारंटी कह कर तारीफ करते है। यहां पर ये कहावत सटीक है कि वो करें तो शिष्टाचार और करे तो भ्रष्टाचार। मोदी करें तो लीला और करें तो कैरेक्टर ढीला। मोदी सरकार और भाजपा की राजनीतिक साजिश अब लोगों को समझ में आ रही है कि वो जब चाहें जहां चाहे पेट्रोल डीजल और रसोई के दाम बढा घटा सकते है। पूरा देश उनकी इस साजिश का खामियाजा भुगतने को मजबूर है।
पांच राज्यों के चुनावों में रसोई गैस पर रियायत क्यों
पांच राज्य मध्यप्रदेश, राजस्थान तेलंगाना, छत्ततीसगढ़ में मोदी सरकार ने अपने चुनावी मेनिफेस्टो में यह गारंटी दी कि अगर उनकी सरकार बनती है तो वहां के रहने वालों को रसोई गैस 450 रुपये में सिलंेडर मुहैया करायेगी। कांग्रेस ने भी अपनी चुनावी घोषणा पत्र में यह एलान किया था कि वो सरकार बनने पर गैस सिलेंडर 500 रुपये में देगी। राजस्थान में सरकार पहले से ही 500 रुपये में रसोई गैस उपलब्ध करा रही थी। ऐसा ही कुछ वादा केन्द्र की मोदी सरकार ने मध्यप्रदेश और छत्तीगढ़ में किया था। मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकर पिछले 18 साल से है। वहां के सीएम शिवराज पिछले चार पांच बार से सरकार चला रहे हैं। वहां डबल इंजन सरकार ने पहले से ही गैस सिलेंडर 450 रुपये में क्यों नहंीं दिया।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवालिया निशान
यहां पर पिछले 20 साल से भाजपा की सरकार है इससे स्थानीय लोगों में भारी असंतोष व्याप्त था। इससे निपटने को मोदी और शिवराज ने ये चुनावी वादा किया ताकि लोग उनके झांसे में आ कर एक बार फिर से भाजपा की सरकार बनवा दें। हुआ भी ऐसा ही भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार बन गयी है। ये बात और है कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग ने सत्ता दल के साथ मिलकर कांग्रेस के साथ धांधली की है। वैसे जनसामान्य लोग भी तीन राज्यों में आये चुनावी परिणाम को संशय से देख रहे हैं। लोगों चर्चा है कि आखिर कैसे भाजपा के 162 से अधिक विधायक जीत कर आये है। कांग्रेस की करारी हार के पीछे का कारण समझ से परे है।








