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पांच राज्यों के चुनाव परिणामों से भाजपा के नेता समझ रहे हैं कि उन्होंने आम चुनाव पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। हां इतना जरूर है कि कांग्रेस को राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अपनी सरकारें खोनी पड़ी हैं। इसे कम नहीं आंकना चाहिये। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इंडिया गठबंधन मोदी शाह के आगे फीके पड़ गये हैं। कांग्रेस के हौसले आम चुनाव को लेकर अभी भी बुलंद हैं। इसके अलावा मोदी शाह को चित करने का हौसला इंडिया गठबंधन के आधा दर्जन दिग्गज पूरी तैयारी से जुटे हुए हैं। इंडिया गठबंधन के उन नेताओं ने प्रण कर लिया है कि वो मोदी शाह के अगले आम चुनाव में देश की राजनीति और सरकार से बेदखल कर देंगे। इन आधा दर्जन नेताओं ने मोदी शाह की रातों की नींद उड़ा दी है। मोदी सरकार इन सभी नेताओं को काबू पाने में पूरी तरह विफल रही है। इन्हें परेशान करने के लिये मोदी शाह ने जांच एजेंसियों को लगा रखा है लेकिन ये सभी लोग मोदी शाह की साजिश में फंस नहीं पा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी के साथ ये सभी दिग्गज नेता एकजुट होकर मोदी सरकार को अपदस्थ करने को संकल्पति हैं। वहीं कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपने आप में भाजपा और मोदी सरकार के लिये भारी मुसीबत साबित हो रहे हैं। वो अकेले ही मोदी सरकार को हैरान करने में सक्षम हैं। इन्हीं सब बातों से मोदी शाह बौखलाये हुए हैं और इंडिया गठबंधन को कमजोर करने की साजिशें रच रहे हैं।
उस्ताद नंबर एक अरविंद केजरीवाल
इंडिया गठबंधन में इस समय दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिनती उन नेताओं में होती है जिन्होंने मोदी शाह की नाक में दम कर रखा है। जब सेअरविंद केजरीवाल ने राजनीति में कदम रखा है तब से भाजपा और कांग्रेस की दिल्ली में राजनीति जीरो कर दिया है। दिन ब दिन अरविंद केजरीवाल का वर्चस्व बढ़ता ही जा रहा है। भाजपा की लाख साजिशों के बाद भी आम आदमी पार्टी का कद देश में बढ़ता ही जा रहा है। पंजाब में भी आम आदमी पार्टी की प्रचंड बहुमत वाली सरकार बन गयी है इससे मोदी शाह का दिन का चैन और रातों की नींद उड़ गयी है। वैसे भी भाजपा का पंजाब में कोई वजूद नहीं रहा है। पहले भी वो अकाली दल के कंधे पर सवार हो कर ही अपनी जीत हासिल करती है। आज के समय में अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी के बीच अच्छी तालमेल हो गयी है। ऐसे में भाजपा के चाणक्य शाह के लिये परेशानियां बढ़ गयी हैं। अगर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का तालमेल ठीक ठाक रहा तो दिल्ली और पंजाब में भाजपा का सूपड़ा साफ होने की आशंका है।

भाजपा की जीत की राह में सबसे बाधा नेता सुशासन बाबू
अगर पूछा जाये कि मोदी के पीएम बनने में सबसे बड़ी बाधा कौन है तो सबसे पहला नाम बिहार के अजेय सीएम नितीश कुमार का नाम सबसे ऊपर आता है। इस बात को मोदी शाह भी जानते हैं कि आम चुनाव में यदि उनका तालमेल नितीश कुमार से नहीं हुआ तो बिहार में उनकी झोली में दस सांसद भी नहीं आयेंगे। यहां पिछली बार जेडीयू एनडीए का हिस्सा थी इसीलिये उनके हिस्से में 18 सीट जीत कर आयी थी। लेकिन इस बार नितीश कुमार ने साफ कर दिया है कि वो मोदी शाह की सरकार को ध्वस्त कर के ही रहेंगे। नितीश कुमार को समझ में आ गया है कि मोदी शाह अपने फायदे के लिये किसी भी एनडीए के दल के साथ धोखा कर सकते है। ऐसा वो जेडीयू के साथ अरुणाचल और मणिपुर में कर चुके हैं। अगर वो समय रहते हएु सतर्क न हो जाते तो आज जेडीयू के दो फाड़ भाजपा कर चुकी होती जैसा कि भाजपा ने शिवसेना और एनसीपी के साथ किया है। इससे सबक लेते हुए नितीश कुमार इंडिया गठबंधन को बनाने में पहल की जिसमें उनका साथ महाराष्ट्र राजनीति के दिग्गज चाणक्य शरद पवार ने बढ़ चढ़कर साथ दिया और आज इंडिया गठबंधन की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव से मोदी शाह की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। मोदी शाह को लग रहा है कि नितीश और इेडिया गठबंधन एकजुट रहा तो अगले आम चुनाव में मोदी का पीएम बनने का सपना टूटने की पूरी संभावना है।
ममता बनर्जी के निशाने पर मोदी शाह
पिछले साढ़े नौ साल में मोदी शाह को करारी मात देने में ममता बनर्जी एक मात्र नेता हैं जिन्होंने भाजपा सरकार और सांसदों को प बंगाल में धूल चटाते हुए बता दिया भाजपा की सांप्रदायिक सोच वहां चलने नहीं दिया जायेगा। भाजपा ने प बंगाल में सत्ता पाने को खूब धार्मिक प्रपंच रचे लेकिन बंगालवासियों ने ममता दीदी में पूरा विश्वास जताया। साथ ही यह जता किया कि अभी भाजपा का सही समय नहीं आया है। यहां केवल ममता दीदी का राज ही चलेगा। ममता दीदी पहले तब एनडीए का हिस्सा बनी थी जब अटल बिहारी पीएम थे। लेकिन अब वो भाजपा नहीं रह गयी है। तब अटल जी सहयोगी दल के नेताओं को भी समानता से देखते थे लेकिन आज पीएम मोदी और शाह एनडीए के विरोधियों के साथ अपने दलों को मौका पाकर खतम करने की साजिशें रचने से बाज नहीं आते हें। आज बंगाल की शेरनी कही जाने वाली ममता दीदी का आशीर्वाद राहुल गांधी के साथ है। इंडिया गठबंधन में ममता बनर्जी की खास पहचान है।

महाराष्ट्र में मोदी शाह को मुंह की खानी पड़ेगी!
आगामी आम चुनाव में सबसे ज्याद नुकसान भाजपा को महाराष्ट्र में होने वाला है। पिछले आम चुनाव में शिवसेना और भाजपा का गठबंधन था तो 48 में 40 सीटें गठबंधन ने जीती थी। लेकिन 2020 में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद शिवसेना और बीजेपी के बीच सीएम पद को लेकर रार मच गयी। मामला इतना बिगड़ कि 25 साल पुराना गठबंधन टूट गया और एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर शिवसेना ने सरकार बना ली। लगभग ढायी साल तक महाविकास अघाड़ी सरकार बेखटके चली लेकिन मई 2022 में भाजपा ने साजिश के तहत शिवसेना के लगभग 40 विधायकों को बागी बनवाया और ऊद्धव ठाकरे की सरकार को गिरवा दिया। इतना ही नहीं शिवसेना के भी दो फाड़ करवा दिये। तब से भाजपा और शिवसेना के बीच जानी दुश्मनी हो गयी है अब भाजपा नेता पूर्व सीएम ऊद्धव ठाकरे और उनके समर्थक नेताओं को पानी पी पी कर कोस रहे हैं उनके पीछे जांच एजेंसियों को लगा दिया गया है। तब से एनसीपी और कांग्रेस शिवसेना के अभिन्न मित्र बन गये हैं। बीजेपी ने इनके बीच मतभेद पैदा करने की काफी कोशिशें की लेकिन तीनों दलों की समझदारी के चलते महाविकास अघाड़ी में एकता बनी हुई है। इससे इंडिया गठबंधन की मजबूती बरकरार है।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार
कर्नाटक सरकार में उपमुख्यमंत्री कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार ने यह साबित कर दिया कि वो रीयल चाणक्य हैं। पिछले छह सात माह में शिवकुमार ने कर्नाटक में भाजपा का सफाया करते हुए कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनवाया। इतना ही नहीं उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री की पार्टी जेडीएस का नामोनिशान मिटा दिया। यहां मोदी शाह की घटिया राजनीति और बजरंगबली वाला घटिया टोटका भी काम नहीं करा। मोदी जी रोते गाते रहे लेकिन जनता ने कांग्रेस में ही अपना विश्वास जताया है। इतना ही नहीं साल भीतर कर्नाटक और तेलंगाना में शानदार जीत कांग्रेस को हासिल कराते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है। आजकल शिवकुमार कांग्रेस आलाकमान के खासम खास सेनापति के रूप में जाने जाते हैं।








