CM Shivraj made glorious history in assembly elections and teach Modi Shah
CM Shivraj made glorious history in assembly elections and teach Modi Shah

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मोदी शाह को मामा ने दिखाया अपना असली रूप

मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सीएम घोषित करने के बाद मोदी शाह को लगा कि उन्होंने पार्टी के सभी दिग्गज नेताओं ने उनकी दासता को सिर झुका का मान लिया है। पार्टी के बीच अब ऐसी आग लग चुकी है जिससे आने वाले समय में मोदी शाह की योजनाओं को पलीता लगने जा रहा है। पीएम मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब ​सिर्फ सपना बन कर रह जायेगा। जिस तरह से मोदी शाह ने शिवराज, रमन सिंह और वसुंधरा को ठिकाने लगाया है उससे लग रहा है कि रंगा बिल्ला जिस तरह से पुराने दिग्गज नेताओं को हाशिये पर ला रहे हैं इन्हीं नेताओं से इन्हें सबसे ज्यादा खतरा दिख रहा है। ये सब इ​सलिये किया जा रहा है कि कोई और नेता पीएम पद की रेस में शामिल न हो जाये। लेकिन अब यह भी लग रहा है कि आरएसएस भी मोदी के विकल्प की तैयारी में जुट गयी है। मोदी शाह की तानाशाही देखते हुए उसने चुप्पी साध ली है। वो किसी भी सूरत में पार्टी को टूटता नहीं देखना चाहती है।

Modi & Shah don't want to Vasundhara as candidate of CM for Rajsthan
Modi & Shah don’t want to Vasundhara as candidate of CM for Rajsthan

राजस्थान में मोदी शाह ने पहली बार बने विधायक भजनलाल शर्मा को सीएम बना कर यह चेता दिया कि कोई भी पुराना दिग्गज नेता उनके लिये सिर्फ कार्यकर्ता से ज्यादा नहीं है। चाहे वो पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया ही क्यों न हो। लेकिन राजनीति में समय के साथ बदलाव आता रहा है। 2019 के आम चुनाव में भाजपा को 24 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। लेकिन आज के समय में इतनी सीटों पर जीत हासिल करने की उम्मीद करना बेवकूफी होगी वो भी जब कि वसुंधरा को मोदी शाह ने सक्रिय राजनीति से बेदखल कर दिया है। जिन दिग्गज नेताओं को दिल्ली दरबार ने हाशिये पे किया है वो आने वाले चुनाव को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

शिवराज ने मोदी शाह को चौंकाया

मध्यप्रदेश सीएम की ताजपोशी के बाद पूर्व सीएम शिवराज ने जनता के बीच जा कर यह कह दिया कि भाजपा ने उन्हें 18 साल तक सीएम पद दिया। ब समय आ गया है कि मुझे भी पार्टी को देना चाहिये। मुझ पर पार्टी का बहुत अहसान है। मैं अपनी बहनों और युवाओं का आभार करना है कि 18 साल तक उन्होंने मामा का सहयोग व समर्थन दिया। मैं अपनी पूरी जिंदगी मध्यप्रदेश में ही रहूंगा। दिल्ली से काम मांगने नहीं जाऊंगा। उससे अच्छा मैं मर जाना पसंद करूंगा। इस बयान के द्वारा पूर्व सीएम ने जो संदेश मोदी शाह को दिया है उससे दोनों में बेचैनी छा गयी है। दिलचस्प यह है कि राजनीति में देखा जाता है कि किसी चुनाव में हार मिलने पर शीर्ष नेतृत्व स्थानीय नेतृत्व में बदलाव करता है। लेकिन यह पहली बार देखने को मिला कि मध्यप्रदेश में प्रचंड बहुमत ​मिलने पर मोदी शाह ने मध्यप्रदेश के चार बार के सीएम को बेइज्जत करते हुए उन्हें हाशिये पर ला दिया है। क्या चार माह के कार्यकाल में सीएम मोहन यादव मोदी शाह के लिये 29 सांसद जिताने की ताकत रखते हैं। शिवराज चौहान की लोकप्रियता और व्यवहार से यह संभव हो सकता था।  शिवराज के साथ एक बात और भी ज्यादा अहम् है कि 18 साल की सत्ता होने के बाद भी वो जनता के बीच रहते थे। हमेशा पूरे प्रदेश में उनकी आमद रहती थी। लेकिन मोदी शाह ने शिवराज को सिर्फ इसलिये दर किनार किया कि उनकी छवि और लोकप्रियता मोदी शाह को बेचैन कर रही थी।

बीजेपी की शक्ति संघ में निहित है

अब तक ऐसा होता था कि बीजेपी और सरकार संघ से पूछ कर या सलाह ले कर बड़े निर्णय लिया करती थी। लेकिन पिछले कई सालों से यह देखने को मिल रहा है कि मोदी सरकार संघ को दर किनार करते हुए बड़े फैसले ले रही है। कई सालों में कुछ ऐसे निर्णय पीएम मोदी और शाह ने लिये जो संघ को बिना बताये और सलाह के लिये हैं। इस बात से संघ काफी नाराज है। संघ को भी लगने लगा है कि पीएम और शाह निरंकुश हो गये हैं उन्हें संघ की भी परवाह नहीं है। देश में जब भी कोई चुनाव होता है तो संघ उसमें अहम् भूमिका निभाता है ​लेकिन इधर रंगा बिल्ला की कारगुजारी से संघ नाखुश व खामोश है। अटल जी की सरकार के समय भी संघ शाइनिंग इंडिया के समय खामोश हो गया था। संघ की सक्रियता और खामोशी दोनों ही खतरनाक होती हैं। संघ की खामोशी से लग रहा है कि वो भी मोदी के विकल्प को गंभीरता से तलाश रहा है। उनकी पसंद के रूप में शिवराज सिंह चौहान पहले नंबर पर हैं। दूसरे नंबर पर नितिन गडकरी भी हो सकते हैं।

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