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तृणमूल कांग्रेस के चारणों का एक बड़ा वर्ग चुनाव से पहले बीजेपी में जा मिला था। `ममता दीदी’ की आरती उतारने वाले बहुत से लोग सुर बदलकर उन्हें `ममता बेग़म’ और `ममता बानो’ बुलाने लगे थे। चुनाव नतीजों ने जब सपने चकनाचूर कर दिये तो यही लोग अब लाउस्पीकर पर माफी मांग रहे हैं और तृणमूल में वापसी के लिए धरना दे रहे हैं। सत्ता की राजनीति से जुड़े लोगों का यही चरित्र होता है। हर पार्टी, हर समूह में ऐसा ही व्यवहार दिखाई देता है।

भारतीय राजनीति के इतिहास में अगर नरेंद्र मोदी पर अगर किसी ने सबसे सनसनीखेज़ आरोप लगाया तो वो कपिल मिश्रा थे। आम आदमी पार्टी के विधायक रहते हुए कपिल मिश्रा ने दिल्ली विधानसभा में दावा किया था कि नरेंद्र मोदी गुजरात के अपने मु्ख्यमंत्रित्व काल में एक लड़की का शोषण किया करते थे।

मिश्रा ने मुख्यमंत्री निवास पर लड़की को बुलाये जाने और उसे जबरन रोके जाने की पूरी घटना का लंबा-चौड़ा वर्णन किया था। उनका पूरा भाषण अब भी यू ट्यूब पर पड़ा हुआ है। वही कपिल मिश्रा अब बीजेपी के एक फायर ब्रांड नेता है। दंगा कराने की क्षमता को देखते हुए मोदीजी ना सिर्फ उन्हें माफ कर दिया बल्कि विधानसभा चुनाव का टिकट भी दिया। थोड़ा और पीछे लौटे तो तो स्मृति ईरानी ने गुजरात दंगों के बाद नरेंद्र मोदी के खिलाफ भरपूर बयानबाजी की थी। वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि ईरानी देखते-देखते मोदी के किचेन कैबिनेट में शामिल हो गईं। राजनीति सिर्फ एक करियर है, उससे ज्यादा कुछ नहीं। ये ऐसी नौकरी है, जिसमें कोई नोटिस पीरियड नहीं होता है। आप सोशल मीडिया पर सिर फोड़ते रहिये, दोस्तों और रिश्तेदारों को दुश्मन बनाते रहिये और फिर एक दिन समझ में आएगा कि जिसके नाम पर आप गला फाड़ रहे थे, वो खुद रातो-रात पाला बदल चुका है।

Rakesh kayastha

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