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इधर पंजाब में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटा कर चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बना दिया। चन्नी को सिद्धू का समर्थन भी प्राप्त था। लोगों को लगा कि अब चन्नी सरकार और पीसीसी चीफ सिद्धू के बीच एक राय रहेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं अचानक पंजाब के सीएम और सिद्धू के बीच अनबन की खबरें आने लगीं। इसी बीच सिद्धू ने आनन फानन में अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया। इससे कांग्रेस आला कमान को सांप सूघ गया। राहुल और प्रियंका ने सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने मे अहम् रोल निभाया था। सिद्धू के इस कदम पर पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह ने चुटकी लेते हुए ट्वीट किया कि मैंने तो पहले ही कहा था कि सिद्धू स्थिर आदमी नहीं है। इससे पहले भी अमरिंदर सिंह ने अपने ट्वीट में कहा था कि अगर अगले चुनाव में कांग्रेस सिद्धू को चेहरा बनाती है तो वो उसके खिलाफ मुहिम छेड़ेंगे। वो हर हाल में सिद्धू का विरोध करेंगे। अब यह लगने लगा है कि कैप्टन साहब ने कांग्रेस को छोड़ने का पूरी तरह मन बना लिया है। इसी लिये उन्होंने राहुल प्रियंका को भी निशाने पर रखते हुए ट्वीट किया कि राहुल और प्रियंका को राजनीति का अनुभव नहीं है। देखने वाली बात यह है कि पंजाब में बीस पच्चीस दिन पहले तक कांग्रेस की सरकार ठीक ठाक चल रही थी कि सिद्धू की जिद और नासमझी के कारण सरकार अस्थिर हुई और हालात से नाराज सीएम अमरिंदर सिंह ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि उनका अपमान किया जा रहा है। अब मैं आगे और अपमान नहीं सह सकता।
यह भी सुना जा रहा है कि कांग्रेस आला कमान ने सिद्धू के जरिये पंजाब के दिग्गज और निडर नेता अमरिंदर सिंह को ठिकाने लगा दिया। इस तरह सिद्धू का इस्तेमाल हो गया और अमरिंदर सिंह भी किनारे हो गये। इसके पीछे यह बताया जा रहा है कि अमरिंदर सिंह पर केन्द्रीय नेतृत्व की मनमानी नहीं चल पा रही थी। अमरिंदर सिंह पंजाब में कांग्रेस की धुरी बन चुके थे। कांग्रेस चाहती है कि पंजाब में भी रबर स्टैंप सीएम हो वो ेजब चाहें तब उसे अपने इशारों पर नचा सकें। लेकिन कैप्टन साहब के रहते यह संभव नहीं हो पा रहा था। इसलिये कांग्रेस ने सिद्धू को बलि का बकरा बना कर चाल चली उसमें सिद्धू और अमरिंदर सिंह दोनों ही फंस गये। कांग्रेस आला कमान ने पंजाब में दलित समाज के विधायक चरण जीत सिंह चन्नी को सीएम बना कर यह सिद्ध कर दिया कि कांग्रेस ने पहली बार किसी एससी नेता को प्रदेश में सीएम बनाया है। चन्नी भी अब केन्द्रीय नेतृत्व के इशारे पर ही काम करेंगे। अभी तो ऐसा ही लग रहा है। उधर नवजोत सिद्धू को लगा कि अब उन उनका सीएम बनने का सपना चूर चूर हो गया। उन्हें लगा था कि चन्नी को सीएम बनवा कर वो सुपर बॉस की तरह प्रदेश सरकार को चलायंेगे। लेकिन अब केन्द्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया कि चन्नी अपने बल पर पंजाब सरकार को चलायें। उन्हेें किसी से सलाह मश्वरा करने की जरूरत नहीं है। सिद्धू को बरा लगा कि मंत्रियों के विभाग बांटने में उनकी सलाह नहीं ली गयी। चुनाव बाद भी उनके सीएम बनने की संभावनाएं भी खत्म हो गयी तो उन्होंने आव देखा न ताव तुरंत सोनिया गांधी को इस्तीफा भेज दिया।
कांग्रेस पार्टी में रोज एक नया प्रपंच देखने को मिल रहा है। पिछले तीन चार माह से पंजाब की राजनीति में उथल पुथल देखने को मिल रही है। पहले कांग्रेस नेतृत्व ने नवजोत सिद्धू को पंजाब कांग्रेस कमेटी का चीफ बनाया तो लगा कि चलो पंजाब कांग्रेस में चल रही नौटंकी खत्म हो गयी लेकिन यह कांग्रेस की भूल थी।

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