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राज्यपाल हैं कि मोदी सरकार के एजेंट
पिछले 9 साल से देश में पीएम मोदी का जलवा कायम है। प्रचंड बहुमत के चलते विपक्ष की कोई बात ही नहंीं सुनी जा रही है। कार्यपालिका और न्यायपालिका पर मोदी सरकार का कब्जा हो गया है। इतना ही नहीं गैर बीजेपी राज्यों में मोदी सरकार ने एलजी और ऐसे बीजेपी नेताओं को राज्यपाल बनाया है जो मनमानी कर रहे हैं। उनका काम सरकार के कामों में बाधा डालना है। इसके साथ ही उन प्रदेशों में आरएसएस और भाजपा का संगठन तैयार करना है। ये लोग मोदी सरकार के एजेंट के रूप में काम कर रहे है। पंजाब, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु, छत्तीसगढ, राजस्थान और राजस्थान ऐसे प्रदेश हैं जहां केन्द्र से नियुक्ति राज्यपाल सरकार के बिलों पर कुंडली मार कर बैठे हैं।

पंजाब के राज्यपाल को एससी ने लताड़ा
जब से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में बनी है तभी से राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने सरकार के कामों पर ग्रहण लगाना शुरू कर दिया था। अभी हाल के सत्र को लेकर पंजाब सरकार और राज्यपाल के बीच ठन गयी। राज्यपाल पुरोहित ने सत्र की अनुमति नहीं दी। जब सरकार ने सत्र बुलाया तो राज्यपाल ने उसे अवैध घोषित कर दिया। इस बात को लेकर सरकार ने राज्यपाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इससे पहले पंजाब सरकार ने राज्य की यूनिवर्सिटीज पर श्री पुरोहित के जबरन हस्तक्षेप पर रोक लगा दी। सरकार ने सदन में बिल पास कर पुरोहित के अधिकार पर कैंची चला दी। राज्यपाल पर सरकार ने यह आरोप लगाये कि ये विश्वविद्यालयों में बेवजह दखल देते हैं। इतना ही नहीं वहां वो संघ और बीजेपी के कार्यकर्ताओं की नियुक्तियां कर रहे हैं। सीएम भगवंत मान का यह कहना है कि राज्यपाल काफी समय से फाइलों पर कुंडली मारकर बैठ गये हैं। न तो पास कर रहे हैं और न ही उन्हें वापस सरकार को भेज रहे हैं। हार कर सरकार को सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सुप्रीमकोर्ट ने राज्यपाल पुरोहित को फटकारते हुए कहा कि आप केन्द्र के इशारों पर काम कर रहे हैं जो आपके अधिकार क्षेत्र के बाहर है। आप सरकार के कामों में बाधा नहीं डाल सकते हैं। सरकार द्वारा भेजी गयी फाइलों को रोक नहीं सकते हैं। सरकार को जनता ने चुना है सरकार की जनता के प्रति जवाब देही है। आप सरकार के साथ तालमेल बिठा कर अपनी भूमिका निभाये। अगर आप ने रवैया नहीं बदला तो मजबूरन हमें दखल देना पड़ेगा।
केन्द्र के एजेंट हैं राज्यपाल!
केरल और तमिलनाडु के राज्यपाल अरएन रवि और आरिफ मोहममद खान भी मोदी सरकार के इशारों पर प्रदेश सरकारों को परेशान कर रहे हैं। तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि पिछले तीन सालों से सरकार की फाइलों को रोके पड़े हैं। आखिर हार कर सीएम सटालिन और केरल के सीएम पी विजयन को सुप्रीमकोर्ट का सहारा लेना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवायी के दौरान पूछा कि तीन सालों से आपने फाइल पर कोई निर्णय क्यों नहीं लिया। आप ऐसा करने के लिये अधिकृत नहंीं हैं। सरकार आप पर केन्द्र सरकार के एजेट का आरोप लगा रही है। ऐसा उन प्रदेशों हो रहा है जहां गैर बीजेपी दलों की सरकारें है। अगर ऐसा नहीं है तो सरकार सुप्रीमकेार्ट आने को क्यों मजबूर हो रही है।








