Ex सीएम की मोदी शाह को खुली चुनौती
मध्यप्रदेश में यह भी चर्चा हैं कि वर्तमान सरकार पूर्व सरकार की योजनाओं को बंद करना रही है। दिलचस्प बात यह है कि सीएम मोहन यादव को केन्द्र से मिला आदेश के अनुसार लाडली बहना स्कीम रोकने को कहा गया है। यह बात तय है कि कुछ तो गड़बड़ है जो योजना का पैसा पंजीकृत महिलाओं के खाते में पैसा ट्रांसफर करने में देरी की गयी है। ये भी चर्चा है कि जब शिवराज को मोदी शाह की मंशा का पता चला तो शिवराज ने सीधे मोदी शाह से बात की। तब जा कर लाडली बहना की राशि मुक्त की गयी। जब पैसा ट्रांसफर करने के बाद शिवराज ने महिलाओं को संबोधित किया कि बहनों ओर भांजियों के खाते में राशि डाल दी गयी है। खाता चेक कर लें।

पूर्व शिवराज चौहान को सरकार बनने के बाद दक्षिण भारत में चुनाव प्रचार के लिये भेज दिया गया था। वहां से लोट कर पूरे प्रदेश में भ्रमण कर रहे हैं। युवा छात्र संसद में शिवराज ने कहा कि पार्टी का सच्चा कार्यकर्ता हूं। पार्टी के आदेश पर ईमानदारी से काम कर रहा हूं। आज भी प्रदेश के अंदर लोग मामा मामा करते हैं। सीएम नहीं हूं तो क्या जनता ने मुझे रिजेक्ट नहीं किया है। किसी पद का न मोहताज हूं और न ही इच्छुक हूं किसी बडी मंजिल की तैयारी कर रहा हूं। चुनाव परिणाम आने के बाद से शिवराज कुछ ज्यादा ही मुखर हो गये हैं। लेकिन उनके बयान शालीनता और मधुरता भरे होते हैं। उनके बयानों को लेकर मोदी शाह भी गंभीरता से समझ रहे हैं।
मोदी शाह की मंशा है कि किसी तरह से शिवराज चौहान का असर जनता में फीका हो जाये ताकि वो अपनी मंशा से प्रदेश सरकार को हांक सकें। लेकिन उनकी मंशा पूरी होते नहीं दिख रही है। शिवराज की छवि जनता में काफी पैठ बना चुकी है।

इन दो राज्यों में बींजेपी का सिरदर्द बढ़ा
नवंबर में भाजपा ने तीन राज्यों में अपनी सरकार बनायी है। लेकिन डेढ़ माह के भीतर जीते हुए राज्यों में उनकी सिरदर्दी शुरू हो गयी है। वहां के सीएम हालात पर नियंत्रण पाने में असफल हो रहे हैं। सरकार में बने मंत्री और मुख्यमंत्रियों के काबू के बाहर हैं। कैबिनेट मंत्रियों के अपने अलग रोने हैं। सरकार ने चुनाव के दौरान जनता से जो वादे किये थे वो सरकार पूरा करने में अक्षम दिख रही है। सरकार को अपने ही विधायकों और मत्रियों दो दो हाथ करना पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भी सरकार और मोदी शाह को आंखें दिखाना शुरू कर दिया है। वर्तमान सीएम अनुभवहीन व नौसिखिये होने के कारण वो सरकार को चलाने में पूरी तरह विफल दिख रहे हैं। सीएम हर किसी समस्या के निराकरण के लिये मोदी शाह के सहारे हैं।
सरकार को संभालने में विफल दिख रहे हैं सीएम
3 दिसंबर को चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश में भाजपा को 163 सीटों पर जीता दिखाया था और बीेजेपी ने प्रचंड बहुमत की सरकार बनायी थी। ऐसे में मोदी शाह ने मोहन यादव को सीएम बनाया है। केन्द्र की सोच थी कि मोहन यादव अन्य दिग्गज बीजेपी नेता शिवराज, कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद सिंह पटेल और ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुकाबले में कम नखरे दिखायेंगे। मोदी शाह जैसा चाहेंगे वैसी ही करेंगे। लेकिन जैसा कि मोदी शाह ने सोचा था वैसा हो नहीं रहा है। मध्यप्रदेश में हो उसका बिल्कुल उल्टा रहा है। सीएम यादव को दिग्गज मंत्री सीएम को कोई भाव नहीं दे रहे हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि मोहन यादव को सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं है। इससे पहले वो सरकार में मंत्री भी नहीं रहे हैं।
मंत्री ने फेसबुक पर सरकार की पोल खोल
इसी वजह से बीजेपी के जो दिग्गज ने मंत्री बने हें वो सीएम को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। एमपी सरकार में राज्य मंत्री बने पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह ने फेसबुक पर अपनी पीड़ा को एक पोस्ट में जाहिर किया है। पंचायत पूर्व केन्द्रीय मंत्री व मध्यप्रदेश में राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल ने फेसबुक पर एक पोस्ट डालकर अपनी नाराजगी जतायी है कि एमपी की सरकार उनके साथ गंभीरता से साथ नहीं दे रही है। उन्होंने पोस्ट में यह लिखा है कि उन्हें पहले जो ओएसडी दिया गया था उसके ऊपर भष्टाचार के आरोप थे उसके बाद जो ओएसडी दिया गया है। उस पर भी लोकायुक्त ने जांच करने की अनुमति मांगी है। प्रहलाद पटेल सरकार की कार्य प्रणाली पर नाराज हैं कि सरकार को ओएसडी नियुक्त करने से पहले जांच पड़ताल कर ओएसडी बनाना चाहिये। एक तरह से राज्य मंत्री पटेल ने अपनी सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। पटेल के पोस्ट पर भी अब सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने इस मामले को मुख्यमंत्री से बातचीत कर हल निकालना चाहिये था न कि फेसबुक पर पोस्ट करना चाहिये। एक तरह से यह अनुशासनहीनता का मामला बन गया है। अब मोदी शाह के लिये यह फैसला लेना टेढ़ी खीर हो गया है कि किस पर कार्रवाई की जाये। दोनों में किसे दोषी माना जाये। इस बात को लेकर विपक्षी कांग्रेस पूरी तरह सरकार को निशाने पर रखे है। चर्चा में यह है कि सरकार ने इस बार लाडली बहना योजना की राशि कम कर दी गयी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी योजनाओं के लेकर मध्यप्रदेश सरकार को घेर रहे हैं।

सही मौके की तलाश में हैं वसुंधरा राजे
राजस्थान में भाजपा की सरकार बने एक माह से ज्यादा का वक्त हो गया है लेेकिन सरकार हिचकोले खाने लगी है। एक तरफ सीएम एक दम अनुभवहीन और प्रशासनिक तौर तरीकों से अनजान हैं। ऐसे में सरकार के काम काज लस्तम पस्तम चल रहा है। दूसरी ओर बीजेपी सरकार कांग्रेस सरकार की पुरानी योजनओं को बंद करने की तैयारी कर रही है। पूर्व सीएम अशोक गहलौत ने नये सीएम भजनलाल शर्मा से मिलकर कहा था कि आप संजीवनी योजना को बंद मत करियेगा। इसका जनता को बहुत लाभ मिल रहा है। लेकिन कुछ दिनों बाद वहीं ही सीएम ने उस योजना को बंद करने की कवायद शुरू कर दी है। वहीं वदसुंधरा राजे भी सक्रिय राजनीति से अलग थलग पड़ गयी हैं। सरकार बनने के बाद उनके समर्थकों को भी सरकार में कोई जगह नहीं गयी है। यही अनुमान लगाया जा रहा है कि राजे लोकसभा चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।








