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मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच तनातनी
यह दिख रहा है कि मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच तनातनी का माहौल है। मोदी सरकार जिस तरह का तालमेल वर्तमान में चाह रही है वैसा तालमेल वर्तमान सीजेआई के बीच बैठ नहीं पा रहा है। पिछले तीन चार माह में बहुत से ऐसे फैसले सुप्रीम कोर्ट ने दिये है उससे मोदी सरकार काफी नाखुश है। मसलन अडानी फ्राड, महाराष्ट्र सरकार और शिवसेना के बीच का मसला, प.बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और उनके भतीजे पर जांच एजेंसियों की सख्ती का मामला, केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और बीजेपी सांसद प्रवेश सिंह वर्मा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस ने सरकार में मंत्री अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से जहां विपक्षी दल काफ सराहना कर रहे हैं वहीं बीजेपी के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आने लगी है। पहले विपक्षी दलों के पक्ष में कोई भी निर्णय सुप्रीम कोर्ट से नहीं आता था। लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट के सभी निर्णयों की जमकर तारीफ की जा रही है। मालूम हो कि वर्तमान सीजेआई नवंबर 2024 तक अपने पद पर बने रहेंगे। इसी बीच आम चुनाव भी होने हैं और बीजेपी इसी बात को लेकर काफी चिंतित दिख रही है।
क्या वजह थी कि मंत्री व बीजेपी सांसद को रियायत दी
आखिर क्या वजह थी कि मंत्री व बीजेपी सांसद को रियायत देते हुए उनके खिलाफ मामला नहीं दर्ज किया गया। सुप्रीम केर्ट ने बिलकीस बानो मामले की सुनवायी करते हुए गुजारत सरकार को फटकारते हुए कहा कि क्या सामूहिक रेप के 11 अपराधियों को रिहा करने का आदेश करते हुए जरा भी विवेक का इस्तेमाल किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से मोदी सरकार क्यों बौखलायी
दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन पीएम मोदी लाल किले से देश महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा पर भाषण दे रहे थे उसी दिन गुजरात सरकार ने ऐसे लोगों को रिहा करने की सहमति बनायी जिन्होंने भयानक और जघन्य अपराध करते हुए एक गर्भवती औरत के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सात लोगों की नृशंस हत्या की थी। ऐसे लोगों की रिहाई के लिये केन्द्र की मोदी सरकार ओर गुजरात की बीजेपी सरकार ने सहमति जतायी जो महा पाप के दोषी थे। इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के इस निदनीय आदेश की कड़ी आलोचना की है। ऐसा लग रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने मन बना लिया है कि वो सरकार की कठपुतली नहीं रहेगा। वो संविधान के हिसाब से ही निर्णय करेगा। इनसे पहले के सीजेआई और सरकार के बीच काफी अच्छा तालमेल दिख रहा था। जैसा मोदी सरकार चाहती उनकी सहूलियत के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से फैसला आ जाता था। लेकिन जब से सीजेआई डीवाई चंद्रचूड ने सुप्रीम कोर्ट की कमान ंभाली है तब से मोदी सरकार के हाथ पांव फूल गये हैं।
मोदी सरकार के निशाने पर सुप्रीम कोर्ट के जज क्यों
कानून मंत्री किरण रिजीजु अक्सर सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ आग उगलते रहते हैं। यहा तक कि उन्होंने पूर्व जजों को सिर्फ इसलिये राष्ट्र विरोधी तत्व कह दिया क्यों कि उन्होंने सरकार की नीतियों और योजनाओं की आलोचना कर दी थी। उन्होंन यहां तक कह दिया कि इन जजों को बख्शा नहीं जायेगा। कानून मंत्री के अलावा देश के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी अक्सर सुप्रीम कोर्ट पर तंज कसते नजर आते हैं। इनके अलावा भाजपा के नेता और मुख्यमंत्री भी देश के न्यायधीशों के खिलाफ जहर उगलते दिख रहे हैं ऐसा इतिहास में पहली बार देखा जा रहा है राजनैतिक दल और सरकार के नुमाइंदे न्यायधीशों के खिलाफ बेखौफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।







