#Rajsthan Politics# MP Politics# Chhattisgarh Politics# Ex CM Shivraj# Ex CM Vasundhara# Raman Singh# PM Modi & Shah# CM Mohan Yadav# Vishnudev Sai# Bhajanlal Sharma#
इन चुके हुए नेताओं का भाजपा में क्या होगा
पिछले तीन रोज्यों के विाधानसभा चुनावों में भाजपा को अच्छी खासी जीत हासिल हुई इसके बाद भी मोदी शाह ने मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में दिग्गज नेताओं को साइड कर दिया है। या यूं कहा जाये कि उनका राजनीतिक जीवन पर पूर्ण विराम लगा दिया है। इसके पीछे कि मंशा यह है कि आज की नयी भाजपा में पुराने नेताओं की कोई जगह नहीं रह गयी है।

इनकी जगह पर केन्द्रीय नेतृत्व ने बिल्कुल नये और सेकंड लाइन लीडरशिप तैयार कर ली है। मोदी शाह का अपने ही दल के नेताओं को साफ संदेश दिया है कि किसी भी नेता का अपना कोई वजूद नहीं है। जो कुछ है वो पार्टी है बाकी सब कार्यकर्ता से ज्यादा कुछ नहीं हैं। कुछ दिग्गज नेताओं और सांसदों को इन चुनावों में ठिकाने लगा दिया गया है। बचे खुचे को भी इसी तर्ज पर ठिकाने लगाने की तैयारी की जा रही है। वैसे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि जिन दिग्गज नेताओं के पर कतरे गये हैं वो भी सही मौके की तलाश में हैं क्यों कि नये मुख्यमंत्रियों के पास कुछ करने के लिये समय नहीं है जिससे वो लोकसभा में भाजपा को सभी सीटों पर जीत दिलवा सकें। ऐसे में पुराने दिग्गज नेताओं की जरूरत तो पड़ेगी है।
मध्यप्रदेश में शिवराज को हाशिये पर रखा
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान को दूध से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया गया है। ये उम्मीद की जा रही थी कि उन्हें प्रदेश की राजनीति से दिल्ली की राजनीति में लाया जायेगा लेकिन एक माह बीतने के बाद भी उन्हें केन्द्र सरकार में कोई जगह नहीं दी गयी है। न ही कोई ऐसे आसार नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में छह सांसदों को मोदी शाह ने चुनाव लडाया था एक को छोड़ बाकी पांच सांसद चुनाव जीत कर विधायक बन गसे है। भाजा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को सरकार में मंत्री बना दिया गया है। वहीं पूर्व कृृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा बना दिया गया है। बाकी सांसद से विधायक बने सांसद सिर्फ प्रदेश की राजनीति तक सीमित कर दिया गया है। मध्यप्रदेश में तीन बार के विधायक मोहन यादव को मोदी शाह ने मुख्यमंत्री पद पर तैनात कर दिया।

राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी दिग्गजों के पत्ते काटे
राजस्थान में मोदी शाह ने प्रदेश में दो बार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की राजनीतिक वजूद खत्म कर दिया है। वसुंधरा को चुनाव परिणाम आने से पहले ही इस बात का एहसास हो गया था कि यह उनका आखिरी चुनाव होने वाला लेकिन उन्हें ये बात नहीं मालूम था कि पार्टी उन्हें तरह से बेइज्जत करेगी। नये मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम का प्रस्ताव वसुंधरा के द्वारा कराया गया। इस काम के लिये मोदी शाह ने राजनाथ सिंह को राजस्थान भेजा था। खून का घूंट पी कर रह गयी वुसंधरा राजे। उसके बाद से मोदी शाह ने वसुंधरा को जलील करने का जारी रखा है। राजे के किसी खास विधायक को मंत्री परिषद में शामिल नहीं किया गया है। इस हालात में वसुंधरा के आगे करो या मरो की बात रह गयी है। शायद वो भी आम चुनाव का ही इंतजार कर रही हैं। ऐसा ही कुछ हाल छत्तीसगढ़ के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम रमन सिंह का हुआ है। प्रदेश भाजपा में रमन सिंह से काबिल और प्रभावशाली नेता नहीं था फिर भी उन्हें सीएम फेस नहीं बनाया गया। चुनाव जीतने के बाद भी रमन सिंह को सीएम नहीं बनाया गया है उनके साथ पर एक अनजान नेता विष्णुदेव साई को सीएम बनाया गया है। इन सब उदाहरणों को देख कर लगता है कि मोदी शाह केन्द्र से ही प्रदेश की सरकारों पर नियंत्रण रखना चाहते हैं। इसीलिये दिग्गज नेताओं को प्रभावहीन बनाया जा रहा है।








