Tanker Truck drivers strike start from first day of new year, they are demanding stop New Mv act
Tanker Truck drivers strike start from first day of new year, they are demanding stop New Mv act

#Modi Govt.# Transport Ministry# Nitin Gadkari# Strike against New MV Act# Drivers Strike against New MV Act.# Supply of daily Needs irregular# Strike Nation wide strike# Godi Media#

ट्रक टैंकर चालकों की मांगों के आगे मोदी सरकार ने घुटने टेक दिये हैं। गृहमंत्रालय के सूत्रों और मीडिया न्यूज से पता चला कि ​सरकार ने नये मोटर व्हीकल ऐक्ट को लागू नहीं किया जायेगा। वैसे अपनी जिद के लिये जानी जाने वाली मोदी सरकार की यह दूसरी हार है जिस पर सरकार ने अपने कदम पीछे लिये हैं। इससे पहले किसानों ने मोदी सरकार को पसीने छुड़ा दिये थे। लेकिन सवा साल तक चले किसान आंदोलन में 700 से अधिक किसानों की शहादत हुई लेकिन न तो पीएम मोदी ने कोई बयान दिया और न ही सरकार के किसी मंत्री ने सांत्वना के दो बोल बोले।
अडिग रहे चालकों की हड़ताल से घबरायी मोदी सरकार
ट्रक ड्राइवरों की तीसरे दिेन भी हडताल जारी है। इस वजह से देश के हर हिस्से में जनता परेशान हो रही है क्योंकि ट्रक और टैंकर चालकों की हड़ताल से दूध, सब्जियां, और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। लगभग आठ लाख से अधिक टैकर ट्रक चालकों ने केनद्र की मोदी सरकार के नये बिल के विरोध में चक्काजाम हड़ताल कर रखी है। दिसंबर माह में मोदी सरकार ने कई बिल बिना ​बहस के ही पास करा लिये क्यों कि विपक्ष 150 सांसदों को लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के सभापति ने संस्पेेड कर सदन से बाहर कर दिया। अब चर्चा यह है कि इस सबके पीछे सरकार की मंशा थी कि इन सांसदों के रहते बिल पास कराने में परेशानी आ सकती है उनकी गैरमौजूदगी में बिलों को बिना किसी रुकावट के पास करवाने में मोदी सरकार सफल रही है। इसी दौरान सरकार ने सड़क दुर्घटना के मामले में यह बिल पास करा लिया कि हिट एण्ड मामले में दोषी चालक को सात लाख का आर्थिक दंड और दस साल की सजा होगी। इस बात से देश के 35 लाख चालकों ने एक तारीख से तीन विसीय देशव्यापी हड़ताल कर रखी है। पूरे देश में आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गयी है। ड्राइवरों ने मोदी सरकार को डिगाने के लिये आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया। चालकों का भी चुनावी साल होने की वजह से मोदी सरकार के गले की हड्डी बन चुका है।

Effect of Truck Tanker strike showing in Sabzi mandi
Effect of Truck Tanker strike showing in Sabzi mandi

हडताल का असर शहरों में दिखने लगा
ट्रक टैंकर चालकों की हड़ताल का असर शहरों में दिखने लगा है। दूध, फल और सब्जी मंडियों में काला बाजरी शुरू हो गयी है। सब्जियों और फलों के दाम आसमान छूने लगे हैं। अगर हड़ताल नहीं खत्म नहीं हुई तो आवश्यक वस्तुओं के दाम और भी ज्यादा बढ़ सकते हैं। लेकिन सरकार इतनी जल्दी चेतेगी इस बात में शक है। सरकार पहले किसी आंदोलन को खत्म करने की पहल करने में दिलचस्पी नहीं रखती है। किसान आंदोलन में सरकार ने सवा साल तक गंभीरता से नहीं लिया लेकिन 700 से अधिक किसानों की शहादत के बाद मोदी सरकार ने काले कानून वापस लिये लेकिन दो किसानों से वादे किये वो आज तक सरकार ने पूरे नहीं किये है।
क्यों नाराज हो गये लाखों ट्रक टैंकर चालक
जब से देश में ये काला कानून पास हो गया है तब से ड्राइवरों में रोष व्याप्त हो गया है। उनका कहना है कि सरकार ने बिना सोचे समझे चालकों के खिलाफ ऐसा अव्यवहारिक कानून पास कर दिया। अगर ये काला कानून वापस नहीं हुआ तो ये ड्राइवर ट्रक टैंकर चलाना छोड कुछ और काम करने पर मजबूर होंगे। मालूम हो कि इस समय देश में ट्रांसपोर्ट के जरिये देश की इकोनॉमी मजबूत होती है। लगभग सात फीसद रेवेन्यू सडक परिवहन के द्वारा अर्जित की जाती है। 60 फीसद माल व जरूरी वस्तुओं की ढुलाई रोड ट्रांसपोर्ट के जरिये होती है। अन्य यात्री भी रोज ट्रांसपोर्ट का इस्तेेमाल करते हैं। लेकिन सरकार ने अपने बिल में जो बदलाव किये हैं उससे ड्राइवर भड़क गये हैं। इस बदलाव में यह कानून बनाया गया है कि यदि किसी चालक से दुर्घटना में कोई सड़क पर किसी की मौत होती है तो उसमे दोषी का दस साल की सजा और सात लाख का जुरमाना लगाया जायेगा। अभी तक पुराने कानून के तहत दो साल की सजा और कुछ आर्थिक दंड लगाया जाता था। एक सर्वे के अनुसार देश में चालकों की सैलरी आठ हजार से बीस हजार तक मिलती है। इसी के अंदर चालक को अपना परिवार पालना होता है। एक ट्रक चालक के साथ एक कंडक्टर भी होता है। इसको मिला कर 70 लाख लोग हो जाते हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट उद्योग से जुड़े अन्य लोग जैसे टायर ट्रयूब से जुड़े व्यवसायी और मिस्त्री और लेबरों को जोड लिया जाये तो यह आबादी लगभग 10 करोड़ तक पहुंच जायेगी।
तो सभी चालक ड्राइवरी छोड़ देंगे
देश भर में लाखों की संख्या में ट्रक नहीं चल रहे हैं। इससे देश के हर हिस्से में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बाधित हो रही है। इसके साथ मेन मीडिया भी हड़जाल संबंधी न्यूज का बायकॉट कर रहे हैं। चर्चा यह है कि ये सब सरकार के इशारों पर किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि चौबीस घंटों में वो कुछ न कुछ इस मसले का जरूर हल निकाल लेंगे। ऐसे में बहुत सारे चालकों ने यह मन बना लिया है कि इन हालातों में ड्राइवरी नहीं कर सकते हैं वो अपने घरों में जाकर खेती बाड़ी कर लेंगे। दस लाख का जुरमाना भरने की हैसियत उनकी नहीं है। इसके साथ पुलिस की ज्यादितियां किसी से छुपी नहीं है। इस बहाने वो चालकों के साथ मारपीट और अवैध उगाही भी करने से बाज नहीं आयेंगे।

Modi govt. made new MV act in last parliamentary session without discussion.
Modi govt. made new MV act in last parliamentary session without discussion.

क्या सरकार नये कानून वापस लेगी!
ताजा हालात में यह देखा गया है कि सरकार ने जो भी कानून बनाये हैं वो उन्हें वापस लेने में अपनी तौहीन समझती है। सरकार का मानना है कि उन्होंने जो रिसर्च और रिपोर्ट तैयार की है वही सही उसे हम वापस या अमान्य नहीं कर सकते हैं। लेकिन किसानों ने अपने अडिग इरादों से मोदी सरकार के तीन काले कानून वापस लेने को मजबूर कर दिया है। सरकार यह समझती है कि जब उनकी पार्टी को हर चुनाव में वोट मिल रहा है उसे मांगों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। महंगाई और भष्टाचार के मुद्दों के बाद भी बीजेपी को लगभग सभी चुनावों में जीत हासिल हो रही है। इसके अलावा देश में विपक्ष की हालत मुर्दे की तरह हो गयी है। क्यों कि जनता विपक्ष को वोट नहीं कर रही है। लेकिन चालक अपने इरादे मजबूत रखते हैं तो मोदी सरकार को एक बार फिर काला कानून वापस लेना पड़ सकता है।

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