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मोदी देश भर में यह दावा करते घूम रहे हैं कि यूपी में रामराज आ गया है। अपराधी दूरबीन से देखने पर भी अपराधी नजर नहीं आता है यह बात देश के गृहमंत्री अमित शाह ने विधानसभा चुनाव के दौरान एक जनसभा में कहा था। कैसे दिखेंगे अपराधी तो चोला बदल कर बीजेपी में शामिल हो गये हैं। इसका जीता जागता उदाहरण यूपी के वाराणसी में देखने को मिला है। बीएचयू में आईआईटी की एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और वीडियो बना कर ब्लैकमेलिंग करने का मामला सामने आया है। इस घिनौने कांड में भाजपा के तीन पदाधिकारियों को पुलिस दो माह बाद गिरफ्तार किया है। हैरत की बाद तो यूपी पुलिस ने इस गंभीर मामले को साधारण छेड़छाड़ दर्ज कर बीजेपी नेताओं को बचाने का काम किया है। यह भी चला है कि इस मामले में स्थानीय पुलिस ने अपराध होने के चार पांच दिनों के बाद पहचान कर उन्हें संरक्षण दिया और वो बात्कारीकारी नेताओं को प्रदेश से बाहर चुनाव प्रचार को जाने की सलाह दी। इस घिनौनी वारदात और पुलिस की लापरवाही से भाजपा की कलई खुल गयी है। एक तरफ नरेंद्र मोदी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देते हैं। सम्मान के खोखले वादे करते हैं वहीं उनके ही संसदीय क्षेत्र में उनकी ही पार्टी के नेता खुलेआम सामूहिक रेप में दोषी पाये जा रहे हैं।

रेपस्टि निकले बीजेपी नेता, नाकाम पुलिस की लापरवाही
एक नवंबर को बीएचयू में छात्रा के साथ सामूहिक बजात्कार कर उसका नग्न वीडियो बनाया गया। इसके बाद उन तीन युवकों की पहचान भाजपा के आईटी से के नेताओं कुनाल पाण्डे, अभिषेक चौहान और सक्षम पटेल के रूप में हुई। इन नेताओं की पहुंच के कारण पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी न करते हुए उन्हें यूपी से बाहर जाने की सलाह दीी और कहा मामला अभी गरम है इसलिये अंडर ग्राउन्ड हो जाओ। मामला ठंडा पड़ने के बाद वापस वाराणसी आ जाना। लेकिन मामले ने तूल पकड़ा तो स्थानीय पुलिस के हाथ पांव फूल गये। बीएचयू के छात्रों ने इस मामले को लेकर मोर्चा और प्रदर्शन शुरू कर दिये। दो माह तक लापरवाह पुलिस छात्रों को जांच पड़ताल के नाम पर बेवकूफ बनाती रही आखिरकार छात्रो ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए प्रदेश व्यापी मोर्चा निकालने का आह्वान किया था। 31 दिसंबर को शहर की लंका पुलिस तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया लेकिन यूपी की भ्रष्ट पुलिस ने मामूली छेड़छाड़ की धाराओं में मामला दर्ज किया है। लोग पुलिस की भूमिका को लेकर चर्चा करते हैं कि मामला बीजेपी से जुड़ा होने की वजह से पुलिस कार्रवाई करने से कन्नी काट रही थी। अब जब पानी सिर से ऊपर बहने लगा तो मजबूरन इन नेताओं को धर पकड़ कर सकी। इसके बावजूद इन आरोपी नेताओं के खिलाफ पुलिस की ओर से कोई रिलीज या प्रेसवार्ता नहीं की गयी। इस बात से पूरे वाराणसी में यूपी पुलिस सरकार के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है। पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान लग रहे हैं कि उसने जानबूझ कर बीजेपी नेताओं को संरक्षण दिया साथ ही उन्हें प्रदेश बाहर जाने में मदद की और ऐक्शन लेने में जानबूझ कर देरी की। आरोपी नेता स्थानीय विधायक और पार्षद के करीबी रिश्तेदार हैं।
आरोपियों के कनेक्शन योगी व मोदी सरकार तक
जैसा कि समाचारों से पता चला है कि यूपी पुलिस ने दो माह बाद जिन बलात्कारी बीजेपी नेताओं को अरैस्ट किया है, उनके तार न केवल योगी से बल्कि पीएम मोदी और केन्द्र सरकार के मंत्रियों तक जुड़े हैं। रेप के आरोपी नेताओं कुनाल पाण्डेय, आनंद उर्फ अभिषेक चौहान और सक्षम पटेल को बीजेपी आईटी सेल की ओर नियुक्त किया गया था। कुनाल पाण्डेय जिला आईटी सेल का अध्यक्ष और सक्षम पटेल उपाध्यक्ष और सक्षम पटेल का कार्यकर्ता है। इन लोगों ने पीड़िता के साथ सामूहिक गैंगरेप कर उसका वीडियो बना कर इंटरनेट पर लोड करने की धमकी भी दी थी। पीड़िता किसी प्रदेश से बीएचयू में आईआईटी कर रही थी। मामला तूल पकड़ने की वजह से इन दागी नेताओं को गिरफ्तार करने पर दबाव बना। जब इस गंदी और घिनौनी वारदात को पता चला तो लोग पीएम के संसदीय क्षेत्र में हुई इस वारदात को लेकर यूपी की बीजेपी सरकार और मोदी सरकार पर लानतें दे रहे हैं। लेकिन न तो इस मामले में सीएम योगी ने कोइ प्रतिक्रिया दी और न केन्द्र की मोदी सरकार की ओर से कोई सफाई है। पीएम मोदी,जेपी नड्डा, सीएम योगी और स्मृति ईरानी के साथ इन रेप के आरोपियों के फोटो सोशल मीडिया पर छाये हुए हैं।







