भारत सरकार ने वोडाफोन के साथ बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय कर मध्यस्थता (पंचाट) मामले में लड़ाई हारने के बाद अंतरराष्ट्रीय कर मध्यस्थता अदालत सिंगापुर में चुनौती दी है। वोडाफोन पर करीब 22,100 अरब डॉलर के टैक्स क्लेम का मामले पर सरकार ने कानूनी मदद ली है।
पिछले महीने एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने कहा था कि भारत सरकार द्वारा पुराने कर कानूनों के जरिये दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वोडाफोन से 22,100 करोड़ रुपये के कर के भुगतान की मांग करना ‘उचित और समान व्यवहार की गारंटी का उल्लंघन बताया था। भारत और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय निवेश संरक्षण करार के तहत यह गारंटी दी गई है।
क्या है ये पूरा मामला
रायटर्स के मुताबिक सरकार सिंगापुर में एक अदालत के समक्ष इसे चुनौती देने पर विचार कर रही थी। सरकार को वोडाफोन को कानूनी लागत के रूप में सिर्फ 85 करोड़ रुपये देने होंगे। सूत्रों ने बताया कि वोडाफोन इंटरनेशल होल्डिंग (नीदरलैंड की कंपनी) ने फरवरी, 2007 में केमैन आइलैंड की कंपनी सीजीपी इन्वेस्टमेंट्स के 100 प्रतिशत शेयर 11.1 अरब डॉलर में खरीदे थे। इससे उसके पास अप्रत्यक्ष तरीके से भारतीय कंपनी एचिसन एस्सार लिमिडेटका 67 प्रतिशत नियंत्रण आ गया था।
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2012 में शुरू हुआ था ये मामला
कर विभाग का मानना था कि यह सौदा भारत में पूंजीगत लाभ कर बचाने के लिए किया गया था। इसके बाद विभाग ने कंपनी से कर का भुगतान करने की मांग की थी। उच्चतम न्यायालय ने 2012 में सरकार की इस मांग को खारिज कर दिया था। भारतीय परिसंपत्तियों के इस तरह के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण को रोकने के मकसद से 2012 में कानून में संशोधन किया गया और भारत में इस तरह के हस्तांतरण को कर योग्य बनाया गया। उसके बाद वोडाफोन से नए सिरे से कर का भुगतान करने की मांग की गई।
वोडाफोन से लड़ाई हारने के बाद अब कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है सरकार







