समुद्री नौवहन क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव लाने के लिए सरकार ने 10 साल का खाका मैरिटाइम इंडिया विजन-2030 तैयार किया है। इसके तहत बंदरगाह परियोजनाओं में तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य है। इससे 20 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकेंगे। बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को समुद्री नौवहन क्षेत्र पर तीन दिन के शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मैरिटाइम इंडिया विजन (एमआईवी) 2030 जारी किया। इस शिखर सम्मेलन में 24 देश भाग ले रहे है।  बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार मैरिटाइम इंडिया विजन-2030 के तहत विभिन्न बंदरगाह क्षेत्रों में तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा और 20 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे प्रमुख बंदरगाहों के लिए सालाना 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय के और अवसर खुलेंगे। 

बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए होगा निवेश

दस्तावेज के अनुसार प्रमुख बंदरगाहों पर बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए एक से सवा लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है। इससे सात से 10 लाख रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।  इसमें गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा-पश्चिम बंगाल संकुल में 80,000 करोड़ रुपये के निवेश से बड़ी क्षमता के बंदरगाहों के विकास का लक्ष्य रखा गया है। 

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सरकार की योजना भारतीय बंदरगाहों पर भारतीय के एक पोत से दूसरे पोत पर चढ़ाने का काम (ट्रांसशिपमेंट) 2030 तक 75 फीसद तक पहुंचाना है। 2020 में ट्रासशिपमेंट की मात्रा 25 फीसद थी। दस्तावेज में कहा गया है कि विजिंजम बंदरगाह के परिचालन में आने तथा कन्याकुमारी और कैम्पबेल बे में ट्रांसशिपमेंट क्षेत्र के विकास के बाद इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। 

कारोबार सुगमता को बेहतर करने पर जोर

इसके अलावा विजन-2030 के तहत कारोबार सुगमता को बेहतर करने पर जोर दिया जाएगा। 2021 तक प्रमुख बंदरगाहों पर प्रक्रियाओं के सरलीकरण और उनको डिजिटल करने के लिए उपक्रम कारोबार प्रणाली (ईबीएस) का क्रियान्वयन किया जाएगा।  दस्तावेज कहता है कि बंदरगाह आधारित औद्योगिकीकरण से प्रमुख बंदरगाहों की 10,000 करोड़ रुपये की राजस्व क्षमता का दोहन हो सकेगा। इससे करीब 20,000 करोड़ रुपये की लागत की बचत होगी। 

10,000 करोड़ रुपये की बचत 

इसमें कहा गया है कि सड़क/रेल से माल ढुलाई को तटीय पोत परिवहन पर ले जाने से लागत में 9,000 से 10,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकेगी।      इसमें हरित सतत बंदरगाहों के विकास की योजना बनाई गई है। इसके तहत 2030 तक अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 60 फीसद किया जाएगा, जो अभी 10 फीसद से भी कम है। 



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