Nitish-Shah pawan
Bihar assembly election will fight under the leadership of Nitis Kumar-Nadda

नयी दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बैठक कर यह ऐलान किया कि नीतीश के नेतृत्व में भाजपा और लोकजन शक्ति पार्टी विधानसभा के चुनाव में जीतने के लिये उतरेगी। चुनाव में नितीश कुमार का चेहरा रख कर प्रचार किया जायेगा। यह भी कहा जा सकता है कि नितीश कुमार बड़े भाई की भूमिका में माने जा रहे है। लेकिन बिहार में राजनीतिक माहौल 2015 वाला नहीं रह गया है। पिछले चुनाव में राजद, कांग्रेस और जनता दल युनाइटेड ने महागठबंधन बना कर बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाया गया था। अब जेडीयू बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रही है।
लोगों का मानना है कि पिछले 15 सालों से बिहार में नितीश कुमार सीएम बने हुए हैं। इसके लिये उन्होंने अपने धुर विरोधी लालू यादव और कांग्रेस से मिलकर सरकार बनायी लेकि मतभेद गहराने के बाद उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर फिर सरकार बनायी और एक बार फिर मुख्यमंत्री बन बैठे। स्थानीय लोगों को यह समझ में आने लगा है कि सुशासन बाबू सत्ता पाने के​ लिये किसी से भी गठबंधन कर सकते है। 2015 के चुनाव में मोदी ने जनसभा के दौरान नितीश कुमार के डीएनए पर ही सवाल उठाये थे। तब नितीश ने अपनी सभा में कहा था कि मोदी ने बिहार के डीएनए पर सवाल उठाये है। बीजेपी से हाथ मिलाने की बजाये हम विपक्ष में बैठेंगे। हम कभी भी बीजेपी से गठबंधन नहीं करेंगे। लेकिन दो साल बाद ही नितीश ने महागठबंधन से नाता तोड़ बीजेपी से हाथ मिला लिये। उनकी बातों का अब जनता विश्वास करेगी आसान नहीं दिख रहा है। वैसे भी बीजेपी इस चुनाव में नितीश कुमार का ही कंधा इस्तेमाल करना चाह रही है।
दूसरी और राजद, कांग्रेस के अलावा बिहार में प्रशांत किशोर, कन्हैया कुमार और अन्य क्षेत्रीय दलों ने भी कमर कस ली है। नितीश कुमार के लिये ये सभी लोग परेशानियां बढ़ा रहे है। नड्डा ने यह कह दिया कि विधानसभा में नितीश कुमार ही चेहरा होंगे। लेकिन क्या इस बात को लोजपा के अध्यक्ष रामविलास यह पासवान और चिराग पासवान पचा पायेंगे। देखा जा रहा है कि चिराग पासवान प्रदेश सरकार के खिलाफ गाहे बगाहे बयान देते रहते है। यह भी सुनने में आया है कि चिराग पासवान कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का मंसूबा रख रहे है। इसके लिये जनअधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव के साथ कुछ समय पहले बातचीत भी हुई है। यह भी सुना जा रहा है कि लोजपा अंतिम क्षणों में कुछ भी फैसला कर सकती है। यह राम विलास पासवान की पकृति रही है इसलिये उन्हें राजनीतिक गलियारे में मौसम विज्ञानी भी कहते हैं।

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