पूर्व राष्ट्र्रपति की आत्मकथा में कांग्रेस की फिर फजीहत
कांग्रेस के लिये समय काफी खराब चल रहा है। एक तरफ पार्टी में अंदरूनी कलह चल रही है दूसरी ओर पूर्व राष्ट्रपति की आने वाली बायोग्राफी ने भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पूर्व प्रेसीडेंट प्रणब मुखर्जी की हाल में ही मृत्यु हुई है। वो काफी समय से बीमार चल रहे थे। प्रणब दाकी आत्मकथा प्रकाशित होने से पहले ही चर्चा में आ गयी है। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस की हार के प्रमुख जिम्मेदार श्रीमती सोनिया गांधी व पूर्व पीएम डा. मनमोहन सिंह है। यह बात चर्चा में उस वक्त आयी जब कि कांग्रेस में संगठन के चुनाव होने वाले हैं। नेशनल प्रेसिडेंट का चुनाव भी होना है। यह बात चर्चा में है कि पार्टी का नेतृत्व कौन करने वाला है। वैसे महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस बात के संकेत दिये हैं कि पार्टी की कमान गांधी परिवार से बाहर व्यक्ति को दी जा सकती हैं।
इस बात के खुलासे से कांग्रेस में खलबली मची है। वैसे भी वर्तमान में कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर काफी घमासान मचा हुआ है। लगभग 24 दर्जन नेताओं ने कुछ माह पहले कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखित पत्र दे कर पार्टी की समस्याओं से अवगत कराया था। इस पत्र से पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने काफी नाराजगी जताते हुए बागी नेताओं के खिलाफ तल्ख टिप्पणी तक कर डाली थी।
बागी वरिष्ठ नेताओं ने पत्र में यह लिखा था कि पार्टी में स्थायी नेतृत्व न होने से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है। हाल में हुए बिहार के चुनाव व उपचुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी निम्नस्तरीय रहा है। नेशनल पार्टी का हाल क्षेत्रीय पार्टियों से भी गिर गया है। कर्नाटक और मध्यप्रदेश में बीजेपी ने खरीदफरोख्त कर अपनी सरकार बना ली। राजस्थान में भी पार्टी और सरकार के बीच तनातनी चल रही है। 2020 में स्वतंत्रता दिवस के आसपास अशोक गहलौत सरकार पर राजनीतिक संकट गहराया वहां भी बीजेपी ने उपमुख्यमंत्री सचिन पाइलेट समेत 2 दर्जन से अधिक कांग्रेसी विधायकों तोड़ने का प्रयास किया। प्रयास सफल होने से पहले केन्द्रीय नेतृत्व की दखल से अशोक गहलौत सरकार गिरने से बचायी जा सकी। वहां भी बीजेपी अपनी सरकार बनाने में सफल हो जाती।
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