Varanasi tourism
Covid19 is hitting the local tourism of Varanasi UP

विजय सिंह
वैश्विक महामारी कोरोना से जहां एक तरफ पूरा जनजीवन अस्त व्यस्त हुआ है, वहीं दूसरी तरफ लगभग सभी देशों के अर्थव्यवस्था पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। देश की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत नींवों में एक पर्यटन की भी कोरोना संक्रमण के चलते कमर टूट गई है। बात की जाए विश्व की प्राचीन नगरी बनारस की तो यहां भी कोरोना के चलते मार्च महीने से पर्यटन और होटल व्यवसायियों का बुरा हाल है।
बनारस में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लाखों लोग करोना महामारी के कारण बुरी तरह से अर्थव्यवस्था से प्रभावित हुए हैं, बनारस के पर्यटन से जुड़े होटल व्यवसाई ,ट्रेवल संचालक, ट्यूरिस्ट बस ड्राइवर कोविड 19 के चलते इस कदर परेशान व हताश हो गए हैं कि उनके समक्ष घर बार चलाने के लिए अब दूसरे रोज़गार की तलाश में या दूसरे रोजगार की राह पकड़ ली है।
25 सालों से होटल व्यवसाय के काम से जुड़े वाराणसी के प्रमुख होटल व्यवसाई प्रदीप चौरसिया के अनुसार भारत में कोविड 19 का प्रकोप आते ही सबसे पहले टूर व्यवसाय और होटल प्रभावित हुआ और सबसे आखरी में ही यह दोनों रिकवर भी होगा। उन्होंने कहा कि जब तक वैक्सीन कि पॉजिटिव रिपोर्ट सामने नहीं आएगी तब तक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बुरा तरह से प्रभावित रहेगा। उन्होंने कहा कि हमने सरकार से घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निवेदन किया है। कोरोना के चलते होटल बंदी के कगार पर है इसके लिए हमलोगों ने सरकार से 2 साल का इंटरेस्ट फ्री इंस्टॉल लोन दिए जाने की मांग भी की गई है। साथ ही ट्रैवल्स पर 6 माह का टैक्स भी छूट किए जाने की मांग की गई है।वहीं पिछले 5 माह से पर्यटन का काम बंद होने से वाराणसी के स्पेनिश गाइड संजय गुप्ता अब एक मोटर स्पेयर पार्ट्स की दुकान में नौकरी कर रहे हैं। गाइड संजय गुप्ता का कहना है कि मार्च माह में लॉकडाउन होने के बाद से ही उनके समक्ष आर्थिक तंगी आने लगी। संजय गुप्ता ने कहा कि टूरिस्ट गाइड्स को सरकार की तरफ से किसी प्रकार की कोई मदद नहीं मिली है। परिवार को चलाना ही है इसलिए मैं ये नौकरी करने को मजबूर हूं।
कई वर्षों से वाराणसी में आने वाले पर्यटकों को बस में बैठा कर घुमाने वाले टूरिस्ट बस ड्राइवर अशोक कुमार सिंह ने बताया कि कोरोना के चलते स्थिति बहुत भयावह है, हम ड्राइवर्स भूखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं। मार्च से हमारा काम धंधा बिल्कुल चौपट हो गया है, जिसके बाद कोई ड्राइवर ऑटो रिक्शा चला रहा, तो कोई हेलमेट बेचकर जीवन व्यापन कर रहा है। ड्राइवर अशोक सिंह ने बताया कि हम लोग वाराणसी के पीएमओ ऑफिस से लेकर सभी अधिकारियों व विधायकों के यहां आर्थिक मदद के लिए चक्कर लगा चुके हैं, पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

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