पिछले साल 30 मई को मोदी सरकार ने दूसरी बार सत्ता की कमान संभाली थी। आज उनकी पहली वर्षगांठ है। देश कोरोना की मार से परेशान है वहीं बीजेपी नेता और मंत्रीगण सरकार की सफलता के थान फाड़ रहे हें कसीदे पढ़ रहे हैं। लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर पैदल घर वापस जाने पर मजबूर हैं। पानी और रोटी के लिये तरस कर कोसों कड़ी धूप में पैदल चल रहे हैं। ओरतें अपने दुधमुहे बच्चों को लेकर नंगे पांव चल रही हैं। सड़क हादसों में भूखे प्यासे प्रवासी मजदूर मारे जा रहे है। ट्रेनों में जनवरों की तरह मजदूरों के साथ बर्ताव हो रहा है। लोग प्यास में जान दे रहे हैं। रेलवे प्लेट फार्म पर भूख प्यास से तड़पते हुए मां ने अपनी जान दे दी। बच्चा अपनी मां के शव के पास उसके जगने का इंतजार करता रहा। इस दिल को झकझोर देने वाले वीडियो ने लोगों को अंदर तक हिला दिया। लेकिन ये नेता किस मिट्टी के बने होते हैजिन्हें उस मासूम बच्चे की पीड़ा और भूख प्यास से जूझती हुई महिला की मैत भी नहीं पिघला सकी।
आज मोदी सरकार के मंत्रीगण विभिन्न् टीवी चैनलों पर बैठकर अपनी सरकार की कामयाबी का गुणगान करते दिख रहे है। वहीं पीएम मोदी ने भी अपने एक साल के कार्यकाल पर एक आडियो जारी कर सरकार की उपलब्ध्यिों का गुणगान किया है। उनका मानना है कि उनकी सरकार ने एक साल में धारा 370, तीन तलाक, राम मंदिर और सीएए जैसे मुद्दों को अंजाम दिया है यह हमारी सरकार के लिये एक मील के पत्थर है। मोदी ने कोरोना के कहर से जूझने के लिये अपनी सरकार की तारीफ की और कि सबके प्रयास से हमारे देश के हालात अन्य देशों के मुकाबले काफी बेहतर है। अमरीका, रूस, जर्मनी, फ्रांस, ईरान और इटली जैसे देशों में संक्रमित लोगों की संख्या में है जबकि भारत में अभी मरने वालो की संख्या काफी कम है। मोदी अपने भाषण में लोगों से धैर्य रखने की बात भी कर रहे है। लेकिन मोदी सरकार को मजदूरों की भूख प्यास और उनके पैरों के छाले नजर नहीं आते है। उनको भाषण और लुभावने वादे दिये जा रहे है। भूख अभी लगी है लेकिन सरकार उन्हें लोन देने की बात कर रही है। कोरोना और लॉकडाउन की वजह से पूरे देश के उद्योग धंधे चौपट हो चुके हैं। कोरोना से पहले सरकार के बजट से भी व्यापारी और छोटे उद्योगपतियों को काफी निराशा हुई थी।
सरकार और बीजेपी सोशल डिस्टेंसिग के कारण सार्वजनिक तोर पर कोई समारोह नहीं कर सकती हैं इसलिये सरकार के मंत्री और पार्टी के दिग्गज नेता वीडियो कान्फ्रेंसिंग जरिये उपलब्ध्यिों का बखान करेंगे। इन मंत्रियों और नेताओं को शर्म नहीं आती कि वो किस मुंह से सरकार की उपलब्ध्यिों का गुणगान कर रहे है। जब कि पूरे देश में प्रवासी मजदूरों की चीखें सुनाई दे रही है। कोरोना और लॉक डाउन के कारण करोड़ों लोगों का रोजगार छिन गया है उनके लिये जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ ही दिहाड़ी मजदूरों के आगे भी पेट पालने का भीषण संकट मुंह बाये खड़ा है।सरकार अंधी व बहरी हो गयी है। सड़क हादसों में मारे जा रहे मजदूरों के कुचले हुए शव उन्हें विचलित नहीं कर रहे है। अनाथ बच्चों का करुण क्रंदन नेताओं के भाषण और वादों में गुम हो रहा है। मंत्री और नेता बेशर्मी की चादर ओढ़ कर सरकार के एक साल पूरे होने का जश्न मनाने से नहीं चूक रहे है।








