चीनी घुसपैठ—पूछो खेत की तो बताते हैं खलिहान की
मोदी सरकार के मंत्री और दिमाग में फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद भक्त अक्सर भूल जाते हैं कि कांग्रेस की कब्र खोदने पर उनके काले कारनामों के जिन्न भी निकल आएंगे। गलवान घाटी में चीन के कब्जे को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की जगह बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर 2005-06 में चीन से चंदा लेने का आरोप लगाया।
असल में नड्डा के मुंह में शब्द मोदी के ही एक कद्दावर मंत्री ने डाले थे। मोदी ने मंत्री को आजकल गड़े मुर्दे उखाड़ने के काम में लगा रखा है। वैसे उनके पास कोई और काम अभी है भी नहीं। लेकिन अफसोस कि वे अपने ही लोगों को बेनकाब कर बैठे। बीते 6 साल से बीजेपी इसी तरह की मूर्खता कर रही है।
1. विदेश मंत्री एस जयशंकर का बेटा आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) से जुड़ा हुआ है। ओआरएफ को 2016 में चीनी उच्चायोग से पैसा मिला। ओआरएफ विदेश नीति पर सरकार को सलाह देता है।
अब क्यों न माना जाए कि भारत की विदेश नीति चीन के पैसे से चल रही है? क्यों न माना जाए कि मोदी ने एक ऐसे शख्स को विदेश मंत्री बना रखा है, जिसके बेटे के संस्थान को चीन ने पैसा दिया है?
2. मोदी सरकार को विवेकानन्द इंटरनेशनल फाउंडेशन भी दिमाग देता है। विदेश और सामरिक नीति बनाने में यह संस्थान 9 चीनी कंपनियों की मदद लेता है।
क्यों न माना जाए कि भारत की विदेश और सामरिक नीति बनाने में चीनी कंपनियों ने मदद नहीं की होगी?
3. विवेकानन्द इंटरनेशनल फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक है अजित डोवाल। वही, जो देश के सुरक्षा सलाहकार भी हैं।
सवाल- चीन की पूर्वी लद्दाख में घुसपैठ के बाद भी मोदी डोवाल को क्यों झेल रहे हैं? क्या इससे हितों का टकराव और और एक दुश्मन पड़ोसी से, जिसने हमारे 20 जवानों को शहीद कर दिया, लाभ लेने की बात साफ नहीं होती?
सवाल तो कई हैं नड्डा साहेब। पहले इनका ही जवाब दे दीजिए।
ORF की वेबसाइट पर लिखा है कि चीन से संस्थान को 1.75 करोड़ रुपये मिले। जयशंकर इसी संस्थान में जाकर भाषण देते हैं।
ये चंदे उतने ही वैधानिक हैं, जितने 2005-06 में कांग्रेस को मिला चंदा।
एक सवाल इससे भी बड़ा है और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों के लिए विचारणीय है कि ऐसे संस्थानों/ थिंक टैंक की अगर नार्थ और साउथ ब्लॉक में आना-जाना है, साथ में मौजूदा मंत्रियों या राष्ट्रीय सुरक्षा के जिम्मेदार पदों पर काबिज़ लोगों के बेटे-बेटी इन संस्थानों में भागीदार हैं तो आम जनता कैसे माने कि देश सुरक्षित हाथों में है?
नेक्सन न्यूज से
सौमित्र रॉय वरिष्ठ पत्रकार की रिपोर्ट








