India vs china
Modi Govt. is nothing doing against China after 20armymen killing at LAC.

Soumitra Roy
5 अगस्त 2019 प्रचंड बहुमत के अहंकार में उन्मादित मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को 3 हिस्सों में बांट दिया। मेरे जैसे बहुतों को इस कदम का विरोध करने पर भद्दी गालियां खानी पड़ीं। मित्रों ने नाता तोड़ लिया।
खैर, यह याद रखने की बात है कि तब संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने पीओके और अक्साई चिन के भी भारत का हिस्सा होने का ऐलान किया था। तब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने दो-टूक शब्दों में इस कदम को चीन की संप्रभुता को नकारने वाला बताया था। लेकिन मोदी सरकार सीएए में मस्त हो गई। नवंबर में सर्वे ऑफ इंडिया ने लद्दाख, जम्मू और कश्मीर का नया नक्शा जारी किया और उसमें अक्साई चिन को भारत में दिखाया। गलवान घाटी के 40 किलोमीटर इलाके पर कब्ज़े के लिए चीन ने उसी समय रणनीति बना ली थी।
मई-जून में कब्ज़ा भी हो गया। भारतीय प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को ऐसे किसी भी कब्ज़े से इनकार करते हुए चीनी अतिक्रमण को जायज़ ठहरा दिया। अब भारत का डार्बुक-शयलोक-दौलतबेग ओल्डी रोड सीधे चीनी तोपों के निशाने पर आ गया है। दौलतबेग ओल्डी में हमारी वायुसेना का अड्डा भी है।
कल भारत ने बहुत कुछ खो दिया है। लद्दाख भले ही एक शीत मरुस्थल हो, लेकिन सामरिक रूप से बेहद अहम है। काराकोरम श्रृंखलाओं के उस पार चीन का शिनझियांग प्रान्त है तो डार्बुक-शयलोक-दौलतबेग रोड एलएसी के समानांतर चलती है, जिसके उस पार अक्साई चिन है।
अब चीन के लिए भारतीय प्रधानमंत्री का बयान एक सबूत बन गया है कि वह निर्दोष है। आगे भारत किस मुंह से और कितनी ताक़त के साथ चीन के साथ सीमा समझौता कर पायेगा? अमेरिका ने कई बार ऐसे किसी समझौते में मध्यस्थता की पेशकश की थी, जिसे हम ठुकरा चुके हैं। फिर कौन है हमारे साथ? हमने तो हांगकांग, ताइवान, सेकंकू द्वीप जैसे मुद्दों पर चुप्पी साधकर चीन की ताकत बढ़ाई है। भारत को अब इसकी ऐतिहासिक कीमत चुकानी ही पड़ेगी।

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