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People disobeyed bann on crakers ordered by Supreme Court of India

हम भरतीयों पर एक कहावत सटीक बैठती है कि हम नहीं सुधरेंगे। सीेधी तरह से कोई बात हम लोगों के हलक से नहीं उतरती जब तक सख्ती न की जाये। यह बात सबको मालूम है कि सर्दियों की शुरुआत होते ही देश में वायु प्रदूषण अपने चरम पर होता है। पिछले चार सालों से दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण इतना बढ़ जाता है कि दिल्लीवासियों का सांस लेना दूभर हो जाता है। ऐसे में एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकाारों को इस समस्या पर काबू पाने के लिये आदेश दिये हैं। हालात नाजुक होते देख सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली व एनसीआर में 30 नवंबर तक आतिशबाजी की बिक्री और जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन दिल्ली में ही उच्चतम न्यायालय के आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गयीं। खुलेआम आशिबाजी की बिक्री हुई और लोगों ने जमकर आतिशबाजी जलायीं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग कान में तेल डालकर सोता रहा। दीपावली के अगले दिन आसमान में गहरी धुंध देखी गयी। लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन की शिकायत हुई। हैरत की बात तो यह है कि लोगों ने सरकार और अदालत की रोक बाद भी महंगी आतिशबाजी खरीदी और माहौल को और भी खराब किया। इस मामलेमें याह दलील दी जाती है कि साल भर का त्यौहार है तो आतिशबाजी छोड़ना जरूरी है। वायु प्रदूषण के लिये केवल आतिशबाजी की दोषी नहीं हैं वाहनों के धुएं का भी योगदान है। दिलचस्प बात यह है कि आतिशबाजी बैन का विरोध वो समाज कर रहा है जो प्र​बुद्ववर्ग कहलाता है। तरह तरह के कुतर्क किये जाते है जैसे अधिकतर प्रतिबंध हिन्दुओं के पर्वों पर ही क्यों लगाये जाते हैं।
लेकिन दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारें वायु प्रदूषण कम करने में सफल नहीं दिख रही हैं। सरकारों की माने तो किसान खेतों में पराली जलाते हैं इसलिये वायु में धुएं की मात्रा में बढ़ावा हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भाजपा शासित राज्य सरकारों कर्नाटक, मध्यप्रदेश और हरियाणा ने अपनी अपनी सहूलियतों के आधार पर बदलाव कर अपने समर्थकों को आतिशाबाजी करने की आजादी दे दी।

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