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दारा शिकोह से उत्तराधिकार की लड़ाई में औरंगज़ेब का साथ सबसे ज़्यादा राजपूतों ने दिया था- प्रमुख थे (महाराणा प्रताप के)मेवाड़ के राणा राज सिंह, आमेर के राजा जय सिंह कछवाहा और मारवाड़ के राजा जसवंत सिंह। असल में औरंगज़ेब के शासन में उसके अपने दरबार में राजपूत मनसबदारों की संख्या शाहजहाँ के 24% से बढ़ कर सीधे 33% हो गयी थी। इसमें अगर हिमाचल और पंजाब के सिख और हिंदू पहाड़ी राजाओं को जोड़ लें तो 50% के ऊपर जाएगी। यहाँ यह भी याद रखें कि गुरु तेग़बहादुर से गुरु गोबिंद सिंह तक मुग़ल सल्तनत से हुई सारी लड़ाइयों में यही पहाड़ी हिंदू राजा थे जो उनसे लड़ते थे, औरंगज़ेब नहीं जाता था। औरंगज़ेब के दीवान ए कुल थे रघुनाथ रे कायस्थ- जो औरंगज़ेब के तमाम विजय अभियानों पर साथ रहे। उनकी मृत्यु पर औरंगज़ेब ने श्रद्धांजलि लेख भी लिखा। याद यह भी करिए कि शिवाजी को गिरफ़्तार करने जो मुग़ल सेना गई थी उसका सेनापति कौन था। सदमा लग सकता है आपको। आंबेर, माने आमेर माने आज के जयपुर के मिर्ज़ा राजा जय सिंह को। उसी जयपुर के जिसकी राजकुमारी और भाजपा सांसद आजकल ताजमहल पर दावा पेश कर रही हैं के राजा औरंगजेब के मनसबदार थे और शिवाजी को ठीक करने भेजे गये थे- किये भी। लंबी घेराबंदी के बाद शिवाजी को मुग़ल सेनापति जय सिंह से पुरंदर की संधि करनी पड़ी जिसमें उनको अपने 23 क़िले ही नहीं, बेटे संभाजी को भी देना पड़ा। संभाजी को मुग़ल मनसबदार बना कर मुग़लों के लिये लड़ने दक्कन भेजा गया। शिवाजी ख़ुद मुग़ल साम्राज्य के अधीन आये- वासल स्टेट बने! अब बस यह बताइए कि अगर औरंगजेब मंदिर तोड़ रहा था तो ये सारे महान हिंदू क्या कर रहे थे?
साभार/आयातित/जस का तस।
अरुण श्रीवास्तव
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