#MyViews#Mybios#Memoories#Authorpage@LitratureNews#Storyteller#LucknowJournalism#Bollywood#TheKashmirFiles#IFFIFilmFestival#ExPMIndiraGandhi#RajivGandhi#
जब से विवेक अग्निहोत्री निर्देशित द कश्मीर फाइल्स बनायी है तभी से विवाद में आ गयी है। समस्या इस बात से नहीं है समस्या इसके द्वारा फैलाया जा रहा झूठा प्रचार है। इस फिल्म को मोदी सरकार और भाजपा का पूरा समर्थन दिया जा रह है। भाजपा शासित प्रदेशों में इस फिल्म को मनोरंजन कर से मुक्त कर दिया गया। प्रदेश सरकारों द्वारा इस फिल्म को देखने के लिये दबाव तक डाला गया। इस फिल्म के बारे में फिल्म महोत्सव आईएफएफआई में चीफ ज्यूरी नादव लापिड ने द कश्मीर फाइल्स को प्रोपोगंडा और अश्लील फिल्म करार दिया है। इस बयान से ट्विटर पर जबरदस्त वार शुरू हो गयी है। कुछ लोग विवेक अग्निहोत्री के पक्ष में खड़े हैं तो कुछ लोग इस फिल्म के विरोध मे। सोशल मीडिया पर ये मामला काफी गरमाया हुआ है।
इसी साल द कश्मीर फाइल्स को रिलीज किया गया। इस फिल्म को लेकर शुरू से ही काफी विवाद रहा। इसमे एक किरदार फौजी अफसर का दिखाया गया है उसकी मां ने आरोप लगाया कि उसके बेटे का किरदार गलत तरीके से दिखाया गया है। उन्होंने इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिये सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की थी। इसके अलावा फिल्म निर्माता पर यह भी आरोप लगाया गया कि इस फिल्म को बीजेपी के इशारे पर बनाया गया है। इस फिल्म के जरिये कांग्रेस को बदनाम करने की साजिश रची गयी है।

झूठे व मनगढ़त कहानियों की भरमार
इस फिल्म में 90 के दशक को दर्शाया गया जब कश्मीरी पंडित अपना पैतृक स्थान छोड़कर भागने पर मजबूर हुए थे। फिल्म में यह दिखाया गया कि कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार और महिलाओं के साथ रेप किया गया। इस सबके लिये वहां की सरकार को जिम्मेदार न ठहराते हुए केन्द्र की कांग्रेस सरकार को दोषी बनाया गया। मालूम हो कि उस समय वीपी सिंह की सरकार थी। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल जगमोहन थे। जगमोहन बीजेपी के ही नेता थे। जिन्हें वीपी सिंह ने जम्मू कश्मीर का गवर्नर बनाया था। इस समय कांग्रेस पावर में नहीं थी। फिर भी फिल्म में कांग्रेस को निशाने पर रखा गया है। इस फिल्म के मेन किरदारों में अनुपम खेर और मिथुन चक्रबर्ती हैं। अनुपम खेर की पत्नी किरण खेर भाजपा की सांसद हैं। मिथुन चक्रबर्ती ने प बंगाल चुनाव से पहले भाजपा ज्वाइन की थी। वो पहले टीएमसी के सांसद थे। इन सबके होने से भी साफ होता है कि यह एक प्रोपेगंडा फिल्म बनायी गयी ताकि इसके जरिये पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व राजीव गांधी को बदनाम करने की साजिश मोदी सरकार की शह पर रची गयी हैं।








