एलएसी पर भारत और चीन के बीच तनातनी जारी है और युद्ध की नौबत बनी हुई है। इस बीच राजनीतिक दलों की तरफ से चीन को कड़ी कार्रवाई देने की मांग जोर पकड़ रही है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि सरकार 1962 वाली गलती को फिर से ना दोहराए। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा, “चीन के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। बीजेपी को दोबारा कांग्रेस वाली गलती को नहीं दोहराना चाहिए।”

राजनाथ बोले- ऑपरेशनल मुद्दे हैं संवेदनशील, सदन को नहीं बता सकते

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा को संबोधित करते हुए चीन के मुद्दे पर अपनी तैयारियां और पड़ोसी देश के नापाक मंसूबों के बारे में बताया। रक्षामंत्री ने कहा, भारत शांतिपूर्ण तरीके से सीमा मुद्दे के हल के लिए प्रतिबद्ध है और हमने राजनयिक माध्यम से पड़ोसी देश को बता दिया है कि यथास्थिति में एकतरफा ढंग से बदलाव का कोई भी प्रयास अस्वीकार्य होगा।

राजनाथ सिंह ने पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर राज्यसभा में दिए अपने बयान में कहा कि हम पूर्वी लद्दाख में चुनौती का सामना कर रहे हैं, हम मुद्दे का शांतिपूर्ण ढंग से हल करना चाहते हैं और हमारे सशस्त्र बल देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए डटकर खड़े हैं। रक्षा मंत्री ने राज्यसभा में चीन को जमकर कोसते हुए कहा कि चीन से सीमा का प्रश्न अब तक अनसुलझा है, अगर एलएसी पर तनाव रहा तो रिश्ते मधुर नहीं सकते।

उन्होंने कहा कि चीन लद्दाख में भारत की लगभग 38,000 स्क्वायर किलोमीटर जमीन का अनधिकृत कब्जा किए हुए है। इसके अलावा, 1963 में एक तथाकथित बाउंड्री एग्रीमेंट के तहत, पाकिस्तान ने पीओके की 5180 स्क्वायर किलोमीटर भारतीय जमीन अवैध रूप से चीन को सौंप दी है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सदन इस बात से अवगत है कि भारत और चीन सीमा का प्रश्न अभी तक अनसुलझा है। भारत और चीन की बाउंड्री का कस्टमरी और ट्रेडिशनल अलाइनमेंट चीन नहीं मानता है। यह सीमा रेखा अच्छे से स्थापित भौगोलिक सिद्धांतों पर आधारित है।





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