सोने की कीमतों में इस साल अस्थिरता का रुख देखा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के बाद से ही गोल्ड की कीमत में अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि इन सबके बाद भी 2021 की शुरुआत में सोने की शुरुआत अच्छी रही थी। लेकिन ईटीएफ में बिकवाली और सीएफटीसी पोजीशन का भी असर पड़ा है। इन अनिश्चितताओं और आशंकाओं के बाद भी उम्मीदें अब भी सबकी ऊंची बनी हुई है। वहीं, दूसरी ओर निवेश और औद्योगिक मांग में वृद्धि की वजह से चांदी को शानदार समर्थन मिला है।
दुनिया भर के विस्तारित मौद्रिक और और राजकोषीय नीतियों से चांदी को लाभ हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने इलेक्ट्रॉनिक व्हिकल, 5जी आइटी, सोलर पैनल आदि में रुचि दिखाई है। जिसका फायदा भी चांदी को मिल सकता है। इसके अलावा जिस तरह से अमेरिकी सीनेट ने यूएस इकोनाॅमी को आगे ले जाने के लिए 1 ट्रिलियन डाॅलर की मदद की घोषणा की है। उसका फायदा इंडस्ट्रीज को होगा। जो कहीं ना कहीं चांदी की कीमतों को भी प्रभावित करेगा वैश्विक स्तर पर भी चांदी की खपत बढ़ने की उम्मीद है।
घरेलू बाजार की क्या स्थिति है
भारत के घरेलू बाजार की अगर हम बात करें तो मोतीलाल ओसवाल फाइनेंस सर्विसेज में कमोडिटी और करेंसी के वाइस प्रेसिडेंट नवीन दमानी कहते हैं कि हम घरेलू मोर्चे पर उम्मीद करते हैं कि सोने की कीमतें 50 हजार रुपये तरफ बहुत तेजी से बढ़ेगी। वहीं, अगले 12 से 15 महीनों में यह 56,500 के पार भी पहुंच सकता है।
वहीं, चांदी के विषय में कहते हैं कि हाल का समय में इसमें अच्छी रिकवरी देखी गई है। यदि कीमतें हाल के उच्चतम स्तर 64,550 रुपये के आस-पास बनी रहती हैं तो आने वाले समय में यह 68,500 रुपये से 70,200 रुपये की तरफ भी बढ़ सकती है। लेकिन अगर कीमतों में गिरावट आती है तो चांदी का भाव 57,200 से 55,000 रुपये तक आ सकता है।
नवीन दमानी को उम्मीद है कि बढ़ती मुद्रास्फीति की उम्मीदें, बढ़ता कर्ज, केन्द्रीय बैंकों की ढिली मौद्रिक नीति, इंडस्ट्रीज के लिए हो रही पैकेज की घोषणाओं का भी असर दिखाई देगा। चांदी एक बेस मेटल होने के साथ-साथ के कीमत धातु है जिसका फायदा कीमतों में दिखेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह साल 2021 रिटर्न के मामले में चांदी ने सोने को पीछे छोड़ दिया है। वह आगे भी जारी रह सकता है।







