जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने को आगामी पांच अगस्त को एक वर्ष पूरा होने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने रविवार (26 जुलाई) को इसका पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किए जाने का आह्वान करते करने के साथ ही उम्मीद जताई कि उच्चतम न्यायालय संविधान के अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किए जाने को खारिज कर न्याय दिलाएगा।

पिछले पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा वा​पस लिए जाने और राज्य को दो हिस्सों में बांटे जाने के बाद पहले मीडिया साक्षात्कार में अब्दुल्ला (82) ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उनकी पार्टी सभी लोकतांत्रिक माध्यमों से बदलाव के लिए संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत संघ में शामिल होने के समय जम्मू कश्मीर की जनता ने जो भरोसा जताया था, यह बदलाव उसी भरोसे के साथ ‘विश्वासघात’ है।

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केंद्र ने पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से विशेष दर्जा यह कहते हुए वापस ले लिया था कि अनुच्छेद-370 के कारण जम्मू कश्मीर में विकास रुक गया है। इसने शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों के विकास को रोक दिया है। इसके अलावा इस अनुच्छेद के कारण आतंकवाद को रोकने में कोई मदद नहीं मिल रही है। अब्दुल्ला की अध्यक्षता वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने तथा पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों – लद्दाख एवं जम्मू कश्मीर – में बांटने के केंद्र सरकार के इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

पार्टी ने उच्चतम न्यायालय में कहा था कि संसद में पारित कानून और उसके बाद राष्ट्रपति की ओर से जारी आदेश असंवैधानिक था। इसके बाद शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई करने के लिये पांच सदस्यीय पीठ का गठन किया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के वरिष्ठ नेता ने कहा, ”एक राजनीतिक दल के रूप में यह जरूरी है कि हम इस बात से जनता को अवगत कराते रहें कि न्याय के लिए हम क्या कर रहे हैं। हम इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट हैं हमें थोपा गया यह बदलाव स्वीकार्य नहीं है और हम लगातार इसका विरोध करते रहेंगे।”

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अब्दुल्ला को पिछले साल पांच अगस्त को अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त किए जाने से पहले गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके बाद उन्होंने सात महीने हिरासत में बिताये है। प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अब्दुल्ला ने कहा, ”हम लोकतांत्रिक माध्यमों के साथ अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे और इसके लिए प्रचार करेंगे। हमने कभी बंदूकों का इस्तेमाल नहीं किया, हमने कभी उन माध्यमों का इस्तेमाल नहीं किया जो संवैधानिक नहीं है। हम मुख्यधारा की लोकतांत्रिक पार्टी हैं और हम अपनी लड़ाई के लिए सभी लोकतांत्रिक माध्यमों का इस्तेमाल करेंगे।”

संघ में शामिल होने के समय जम्मू कश्मीर की जनता ने जो भरोसा जताया था, इस बदलाव को उस भरोसे के साथ ‘विश्वासघात’ करार देते हुए नेकां प्रमुख ने कहा, “दिल्ली (भारत संघ) में हमने जो भरोसा जताया था, वह अब शून्य हो चुका है।” अब्दुल्ला ने कहा, “भरोसे की कमी है, और केंद्र को दोबारा विश्वास बहाल करना है। यह विश्वास तभी आएगा जब राज्य का दर्जा बहाल हो और जो अन्य बदलाव किए गए हैं उन्हें वापस लिया जाए।” उन्होंने कहा, ”जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने (केंद्र) कहा कि एक बार इसे (अनुच्छेद 370) हटा दिया जाता है तो जम्मू कश्मीर में विकास होगा, आतंकवाद समाप्त हो जाएगा। मैं उन लोगों से पूछना चाहता हू कि क्या आतंवकाद का खात्मा हआ? कम होने की अपेक्षा इसमें बढ़ोतरी हुई है। क्या कोई विकास हुआ? हमारे पास जो कुछ था, उसे भी हमने खो दिया है।”

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उच्चतम न्यायालय जाने के उनकी पार्टी के निर्णय के बारे में बताते हुए अब्दुल्ला ने कहा, ‘न्यायपालिका में हमारे विश्वास के कारण हम देश की सबसे बड़ी अदालत से न्याय की मांग कर रहे है। हमें उम्मीद है कि हमारे साथ न्याय किया जाएगा।” पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा वापस बहाल किया जाना चाहिए और जो भी बदलाव किए गए हैं उसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य की जनता से कहा, “हम उच्चतम न्यायालय की ओर देख रहे हैं।”

यह पूछे जाने पर कि उनकी पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में हिस्सा लेगी, नेकां अध्यक्ष ने कहा कि इस पर वह निर्णय नहीं करेंगे, पार्टी की कार्यकारिणी समिति इस बारे में निर्णय करेगी। उन्होंने कहा, “जब स्थिति सामने आयेगी तो हम एक साथ बैठेंगे और देखेंगे कि क्या होता है।” अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के लिए नए अधिवास कानूनों की तीव्र आलोचना की, और कहा कि नेकां ने हमेशा आशंका जताई थी कि इसकी जनसांख्यिकी को बदलने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा, “अब हमारा डर सही हो रहा है। हम इसके लिए संघर्ष करेंगे।’ 





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