श्रीलंका में अफगानिस्तान के राजदूत एम अशरफ हैदरी ने भारत को लेकर निराशा व्यक्त की है। उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय के एक ट्विटर पोस्ट पर सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त की। भारतीय नागरिकों को काबुल से निकालने का जश्न मनाते हुए दिखाने जाने को लेकर वह मायूस दिखे। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘यह कितना दयनीय, कितना संवेदनहीन है। किस बात की खुशी! अफगानों को पीछे छोड़ने के लिए? हमारे द्वारा साइन किए गए रणनीतिक साझेदारी समझौते को याद रखें। घोर निराशा। हम इसे नहीं भूलेंगे!’ ट्वीट करने के कुछ ही देर बार अशरफ हैदरी ने इसे डिलीट कर दिया।

यह ट्वीट अशरफ ने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची के वीडियो ट्वीट के जवाब में किया था। इस वीडियो ट्वीट में भारतीय लोग ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते नज़र आते हैं। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा गया था- जुबिलेंट अपने घर की यात्रा पर निकले।

अफगानिस्तान के इतिहास में गनी का काल दागदार रहेगा

इससे पहले 16 अगस्त को, भारत में अफगानिस्तान दूतावास ने एक ट्वीट में भगोड़े राष्ट्रपति अशरफ गनी की आलोचना की थी। बाद में दूतावास के प्रेस सचिव अब्दुलहक आजाद ने दावा किया कि उनके पास इस ट्विटर पेज का एक्सेस नहीं है। यह पेज शायद हैक कर लिया गया है। डिलीट किए गए ट्वीट में लिखा था, ‘हम सब शर्म से सिर पीट रहे हैं। गनी बाबा अपने लफंगों के साथ भाग गए। उन्होंने सब कुछ खराब कर दिया। भगोड़े की सेवा करने के लिए हम माफी मांगते हैं। अल्लाह गद्दार को सजा दे। अफगानिस्तान के इतिहास में गनी का काल दागदार रहेगा।’

अफगानिस्तान से लोगों को निकाल रहा भारत

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से भारत ने अब तक 750 से अधिक अफगान और भारतीय नागरिकों को काबुल से बाहर निकाला है। और अभी लोगों को बाहर निकालने का काम जारी है। भारत ने अफगान नागरिकों के लिए एक ई-इमरजेंसी वीजा भी शुरू किया है। इस सबके साथ भारत ने एक स्पेशल सेल बनाया हैं जहां से लोगों की मदद की जा रही है। 22 अगस्त तक भारत को 2000 से अधिक इमरजेंसी कॉल आ चुके हैं। अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए अब तक 1200 से अधिक ईमेल के जवाब दिए गए हैं।

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