महंगाई की आंच से अब आइसक्रीम भी पिघलेगी।  सीबीआईसी ने बुधवार को कहा कि पार्लर या इस तरह की दुकानों द्वारा बेची जाने वाली आइसक्रीम पर 18 फीसद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगेगा।  केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने 21 वस्तुओं और सेवाओं से संबंधित दरों में बदलाव पर व्यापार और उद्योग द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट किया, जिसका निर्णय 17 सितंबर को 45वीं जीएसटी परिषद की बैठक में लिया गया था। 

 आइसक्रीम पार्लर के संबंध में सीबीआईसी ने कहा कि ऐसे स्थान पहले से विनिर्मित आइसक्रीम बेचते हैं और रेस्तरां की तरह नहीं होते हैं।  सर्कुलर में कहा गया, ”आइसक्रीम पार्लर किसी भी स्तर पर खाना पकाने के किसी भी रूप में संलग्न नहीं होते हैं, जबकि रेस्तरां सेवा प्रदान करने के दौरान खाना पकाने/तैयारी करने के काम में शामिल होते हैं।”

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बोर्ड ने स्पष्ट किया कि उनकी गतिविधि में आइसक्रीम की आपूर्ति माल (एक निर्मित वस्तु) के रूप में होती है, न कि सेवा के रूप में, भले ही सेवा के कुछ तत्व मौजूद हों। इसपर 18 फीसद की दर से जीएसटी लगेगा।   ईवाई टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि पहले कुछ मामलों में अधिकारियों ने कहा था कि आइसक्रीम पार्लर में बेची जाने वाली आइसक्रीम को रेस्तरां सेवाओं के तहत कवर किया जाएगा (थोक ऑर्डर में बेचे जाने को छोड़कर) और इसलिए 5 फीसद की जीएसटी दर लगाई जाएगी।

सर्कुलर में अब प्रावधान है कि चूंकि आइसक्रीम पार्लर पहले से ही विनिर्मित आइसक्रीम बेचते हैं, इसलिए उनपर रेस्तरां वाली बात लागू नहीं होती है और तदनुसार, 18 फीसद (आईटीसी के साथ) का जीएसटी लगेगा। 



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