कंपनियों के तिमाही नतीजों और अमेरिका-चीन संबंधों से जुड़े घटनाक्रमों से इस सप्ताह शेयर बाजारों की दिशा तय होगी। इसके अलावा निवेशकों की निगाह कोविड-19 के रुख पर भी रहेगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। अमेरिका-चीन संबंध और खराब होने तथा कई देशों में कोविड-19 संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहने से आर्थिक पुनरोद्धार को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के चलते बीते सप्ताह वैश्विक स्तर पर निवेशकों ने काफी सतर्क रुख अपनाया। चीन ने पिछले सप्ताह चेंगडू में अमेरिका के वाणिज्य दूतावास को बंद करने का निर्देश दिया।

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इससे पहले अमेरिका ने जासूसी का आरोप लगाकर चीन के ह्यस्टन के वाणिज्य दूतावास को बंद करने का निर्देश दिया था। कोरोना वायरस की बात की जाए, तो भारत में इस महामारी से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 13,85,522 पर पहुंच गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार रविवार तक यह महामारी 32,063 लोगों की जान ले चुकी है। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि भारत में संक्रमण के रिकॉर्ड मामलों से निवेशकों में बेचैनी बढ़ी है। अमेरिका-चीन तनाव से वैश्विक बाजार भी प्रभावित हुए हैं। इस मोर्चे पर किसी और घटनाक्रम से बाजार पर असर पड़ेगा। इस सप्ताह कोटक महिंद्रा बैंक, टेक महिंद्रा तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे आने हैं। इसके अलावा सप्ताह के दौरान एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम बुधवार को फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर निर्णय रहेगा। 

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बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,109 अंक या 2.99 प्रतिशत के लाभ में रहा। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में 292 अंक या 2.68 प्रतिशत की बढ़त रही। चॉइस ब्रोकिंग के कार्यकारी निदेशक सुमीत बगाड़िया ने कहा, निवेशकों की निगाह तिमाही नतीजों, अमेरिका-चीन तनाव, कोविड-19 के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और इसके टीके के विकास से संबंधित घटनाक्रमों पर रहेगी। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा डॉलर के मुकाबले रुपये के रुख से भी बाजार की धारणा पर असर पड़ेगा। 

एफपीआई ने पूंजी बाजारों से 86 करोड़ रुपये निकाले

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जुलाई में अब तक भारतीय पूंजी बाजारों से शुद्ध रूप से 86 करोड़ रुपये की निकासी की। कोरोना के बढ़ते मामलों तथा अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ने से जुलाई में एफपीआई बिकवाल बने हुए हैं। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एक से 24 जुलाई तक विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजारों में 2,336 करोड़ रुपये डाले, लेकिन उन्होंने ऋण या बांड बाजार से 2,422 करोड़ रुपये निकाले। इस तरह उनकी शुद्ध निकासी 86 करोड़ रही। पिछले महीने एफपीआई ने शुद्ध रूप से 24,053 करोड़ रुपये डाले थे। मॉर्निंगस्टार इंडिया के प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय बाजारों में निवेश को लेकर एफपीआई ने सतर्कता का रुख अपनाया हुआ है। दुनियाभर में कोरोना मामले बढ़ रहे हैं, अमेरिका-चीन में तनाव बढ़ रहा है तथा भारतीय अर्थव्यवस्था अभी झटके खा रही है। इन सब कारणों से विदेशी निवेशक निवेश से कतरा रहे हैं। 





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