घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट के साथ शुरुआत और व्यापक आर्थिक आंकड़ों की घोषणा से पहले रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी मुद्रा डॉलर के मुकाबले 41 पैसे टूटकर 75 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे चला गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 74.97 पर खुला और आगे गिरावट दर्ज करते हुए 75.14 के स्तर पर आ गया, जो पिछले बंद के मुकाबले 41 पैसे की गिरावट को दर्शाता है। रुपया शुक्रवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 74.73 पर बंद हुआ था।

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कारोबारियों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, विदेशी कोषों की निकासी, कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तेजी और घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली के चलते घरेलू मुद्रा पर दबाव बना।

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डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट सरकार के साथ आपकी मुश्किलें भी बढ़ा देती है। इससे तेल की कीमतें बढ़ती हैं जिसका सीधा असर आपके बजट पर होता है। आइए जानें कमजोर रुपया किस तरह आपकी जेब और जीवन पर डालता है प्रभाव..

रुपये के कमजोर होने से इस क्षेत्र को नुकसान

  • कच्चा तेल पर असर: इस क्षेत्र को रुपये की कमजोरी से सबसे ज्यादा नुकसान होता है, क्योंकि यह आयात किया जाता है। कच्चे तेल का आयात बिल में बढ़ोतरी होगी और विदेशी मुद्रा ज्यादा  खर्च करना होगा। 
  • कैपिटल गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक सामान: रुपये की मजबूती से इस सेक्टर को भी राहत मिलती क्योंकि रुपये की मजबूती से भारत में सस्ते कैपिटल गुड्स मिलते हैं। वहीं रुपया कमजोर हो तो कैपिटल गुड्स के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र को भी नुकसान होगा, क्योंकि समहंगे इलेक्ट्रॉनिक गु्ड्स आयात किए जा सकेंगे।  रुपये की कमजोरी का नकारात्मक असर जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर पर दिखाई देगा। इससे यह महंगा होगा और आयात पर भी इसका असर आएगा। 
  • उर्वरक की कीमत बढ़ेगी:  भारत बड़ी मात्रा में जरूरी उर्वरकों और रसायन का आयात करता है। रुपये की कमजोरी से यह भी महंगा होगा। आयात करने वालों को यह अधिक दाम में कम मिलेगा। इससे इस क्षेत्र को सीधा नुकसान होगा।

 रुपये की कमजोरी से इन क्षेत्रों को फायदा

  • आईटी क्षेत्र: रुपये की कमजोरी से  कंपनियों को मिलने वाले काम पर इनकम बढ़ेगी, जिससे उनको फायदा होगा। 
  • दवा निर्यात:  रुपया कमजोर होने से इस सेक्टर का निर्यात भी बढ़ेगा। 
  • कपड़ा क्षेत्र को फायदा: रुपया मजबूत होता है तो इस सेक्टर को निर्यात में काफी नुकसान होता है। वहीं कमजोर होता है तो फायदा। टेक्सटाइल निर्यात में भारत वैश्विक रैकिंग में फिलहाल दूसरे स्थान पर मौजूद है। यदि रुपया कमजोर हुआ तो इस सेक्टर को भी काफी फायदा होगा। 
  • पढ़ाई सस्तर होगी: रुपया कमजोर होने से विदेशी में पढ़ाई करना सस्ता हो जाएगा। साथ ही विदेश यात्रा भी सस्ती हो जाएगी।



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