कांग्रेस पार्टी में फिर राहुल गांधी को पार्टी की कमान सौंपने की मांग उठी है। राजस्थान के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में आज यह बात रखी। सूत्रों के मुताबिक, अशोक गहलोत की इस मांग के यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी. ने भी समर्थन किया है। उन्होंने कहा कहा कि कांग्रेस पार्टी को एक वर्चुअल मीटिंग बुलानी चाहिए और राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।

आपको बता दें कि राहुल गांधी 2017 में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बने। लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में कोरोना, तेल के दाम और चीन के साथ सीमा पर जारी तनाव को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया है। बैठक की जानकारी देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘इस विशेष बैठक में 3 प्रस्ताव पारित हुए। CWC ने 17 दिन से शर्मनाक तरीके से पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार भारत सरकार द्वारा बढ़ाए जाने पर गहन चिंता प्रकट की और याद दिलाया कि 6 साल में 12 बार से अधिक एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर मोदी सरकार 18 लाख करोड़ कमा चुकी है।’

सुरजेवाला ने कहा, CWC ने कहा कि ये ₹18 लाख करोड़ संकट की इस घड़ी में देश की जनता के लिए इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा? CWC ने पूछा कि 17 दिन से लगातार तेल के दाम बढ़ाने, 5 मई को पेट्रोल-डीजल पर क्रमशः 10 और 13 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने और 5 मार्च को 3 रुपए प्रति लीटर कीमत बढाने के पीछे इस महामारी में सरकार की दुर्भावना क्या है?’

CWC ने मनरेगा के कार्यदिवस बढ़ाकर 200 दिन किए जाने की वकालत की। साथ ही, मुफ्त भोजन के प्रावधान को 30 सितंबर 2020 तक अवश्य बढ़ाया जाए। 20 लाख करोड़ के जुमला पैकेज की चर्चा करते हुए CWC ने भारत सरकार से आग्रह किया कि एक प्रतिशत से कम का ये पैकेज न उद्योग धंधों की मदद करेगा और न ही खपत की शुरुआत कर पाएगा। इसलिए सरकार को लोगों को नकद पैसा देने पर विचार करना चाहिए

सुरजेवाला ने बताया कि गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो झील और हॉट स्प्रिंग्स के भारतीय इलाकों में जबरन चीनी घुसपैठ की अनेक खबरों पर CWC गहन चिंता व्यक्त करती है। चीन सहित किसी को भी संदेह नहीं होना चाहिए कि ये इलाके भारत के अखंड भूभाग के अभिन्न व अविभाज्य हिस्से हैं। मनमाने व अकारण अतिक्रमण एवं घुसपैठ द्वारा गलवान घाटी सहित हमारे भूखंड पर दावा करने का चीनी दुस्साहस न तो सहन किया जाएगा और न ही स्वीकार्य है।





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